मेरठ की सिवालखास पर सपा-रालोद में खींचतान से खिला भाजपा का चेहरा

उत्तराखंडमेरठ की सिवालखास पर सपा-रालोद में खींचतान से खिला भाजपा का चेहरा

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मेरठ की सिवालखास पर सपा-रालोद में खींचतान से खिला भाजपा का चेहरा

मेरठ/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन में मतभेद दिखाई देने लगा है। जाट बाहुल्य मेरठ की सिवालखास सीट को लेकर राष्ट्रीय लोक दल के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया है। रालोद कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस सीट पर किसी जाट नेता को टिकट देना चाहिए था लेकिन समाजवादी पार्टी ने पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद को टिकट दे दिया है। अब जाट समुदाय के समर्थकों ने रालोद के सामने अपनी व्यथा कही है। जाट समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में दिल्ली स्थित रालोद कार्यालय पर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। समर्थकों का कहना है कि जयंत चौधरी सिवालखास सीट को ना छोड़े, इसे समाजवादी पार्टी के खाते में ना दें।

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2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान सीटों के बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था। जिसके बाद पूर्व मंत्री और तत्कालीन राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने उस चुनाव में अकेले अपने प्रत्याशियों को उतारा था। जबकि समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था। 2022 में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल का मजबूत गठबंधन है। सूत्रों का कहना है कि रालोद मेरठ की 2 सीट अपने खाते में चाहती थी। इन 2 सीटों में सिवालखास और दूसरी सीट सरधना है। हालांकि सरधना सीट पर समाजवादी पार्टी ने अतुल प्रधान को अपना कैंडिडेट बनाया है। ऐसे में रालोद समर्थक यह चाहते थे कि किसी भी कीमत पर सिवाल खास की सीट रालोद के खाते में ही रहे। इसके बावजूद समाजवादी पार्टी ने यहां से अपना प्रत्याशी उतार दिया है। जबकि साधना सीट पर ताल ठोक रहे अतुल प्रधान गुर्जर समाज से हैं और वह दो बार भारतीय जनता पार्टी के संगीत सोम से चुनाव हार चुके हैं। प्रदर्शन कर रहे जाट समुदाय के लोगों का मानना है कि सिवालखास की सीट लोकदल को नहीं मिलने से मेरठ की 6 सीटों पर असर पड़ेगा। यहां पर जाट बिरादरी निर्णय की स्थिति में है और ऐसे में यह सपा रालोद गठबंधन से अलग हो सकते हैं। वहीं दूसरी और समाजवादी पार्टी ने मेरठ की 6 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित किए हैं। जिनमें से 4 मुस्लिम प्रत्याशी हैं। शहर विधानसभा सीट से सपा विधायक गुलाम मोहम्मद किशोर विधानसभा सीट से पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर हस्तिनापुर सुरक्षित सीट से पूर्व विधायक योगेश वर्मा सरधना विधानसभा सीट से अतुल प्रधान सिवालखास विधानसभा सीट से पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद दक्षिण विधानसभा सीट से आदिल को समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया है। देखा जाए तो मेरठ में समाजवादी पार्टी ने रालोद को एक भी सीट नहीं दी है।

आपसी खींचतान में भाजपा को फायदा

सपा और रालोद कार्यकर्ताओं के बीच इस आपसी खींचतान में भारतीय जनता पार्टी को सीधा फायदा मिलता हुआ दिखाई दे रहा है। समाजवादी पार्टी के दौरान 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद जाट और मुस्लिम समाज एक दूसरे के खिलाफ आ गए थे। इसका सबसे बड़ा फायदा भारतीय जनता पार्टी को हुआ था जिसने 2014 के लोकसभा चुनाव में हिंदू वोटों की बदौलत एकतरफा जीत दर्ज की थी। जिसमें माना गया था कि जाट समुदाय ने भारतीय जनता पार्टी को खुलकर मतदान किया। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी मुजफ्फरनगर दंगे का असर दिखाई दिया और यहां पर राष्ट्रीय लोक दल को सिर्फ छपरौली सीट से ही जीत मिली थी। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से तीनों कृषि कानूनों को लागू करने के बाद किसान आंदोलन से जाटलैंड में भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ नाराजगी बढ़ी है। केंद्र की मोदी सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस तो ले लिए हैं लेकिन यह नाराजगी अभी भी बरकरार दिखाई दे रही है। सपा और रालोद जाट व मुस्लिमों को एक साथ लाने का प्रयास कर रही हैं। मेरठ की दक्षिण सीट मुस्लिमों का गढ़ मानी जाती है और कैंट भाजपा का गढ़ है। किसान आंदोलन के बाद राष्ट्रीय लोक दल यहां पर काफी मजबूत हुआ है ऐसे में उसे एक भी सीट ना मिलना गठबंधन को नुकसान पहुंचा सकता है।

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सिवालखास की सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने जाट समुदाय के प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा है। सपा के मुस्लिम प्रत्याशी की तुलना में भाजपा के प्रत्याशी की स्थिति काफी मजबूत बताई जा रही है। वही अब सपा और रालोद के बीच बढ़ रहे मतभेद की वजह से या फासला और बढ़ता जा रहा है और भारतीय जनता पार्टी वहां पर लगातार मजबूत होती जा रही है।

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