भाजपा नए मतदाताओं को साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। इस समय भाजपा का एजेंडा मुस्लिम मतदाताओं को पार्टी के साथ जोड़ने का है। भाजपा की इस नई रणनीति पर भाजपा मुस्लिम नेता काम कर रहे हैं। भाजपा के एक मुस्लिम नेता की माने तो भाजपा इस समय 2024 की तैयारी के तहत मुस्लिम वर्ग के मतदाताओं में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में भाजपा मुस्लिम समुदाय में सैयद, शेख, पठान, मिर्जा, मुगल जैसी उच्च जातियों छोड़कर अधिकत जातियां पिछड़ी हुईं और गरीब हैं। भाजपा अपने साथ मुसलमानों के इन्हीं पिछड़े और गरीब लोगों को साथ लाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए भाजपा ने सर्वे भी करवाया। इसके अनुसार पिछड़े मुस्लिमों की राजनीति में उपस्थिति काफी कम है। भाजपा ने इस वर्ग से आने वाले मुस्लिमों को राजनीति की मुख्य धारा में शामिल करने की कोशिश शुरू कर दी है। वहीं भाजपा के सर्वे के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार की अधिकांश योजनाओं का लाभ गरीब मुसलमानों को मिला है। अब भाजपा इसे भुनाने की कोशिश में जुट गई है। भाजपा के मुस्लिम नेता अब घर-घर जाकर बताएंगे कि नरेंद्र मोदी सरकार और योगी सरकार ने उनके लिए क्या-क्या किया है? ये बताने की कोशिश करेंगे कि जो दल आज तक वोट लेते रहे हैं, उन्होंने कुछ नहीं किया और जिन्हें कभी वोट नहीं दिया, उन्होंने आपको रहने के लिए पक्का घर, इलाज को पांच लाख की व्यवस्था, अच्छी शिक्षा, बिजली, पानी, सिलेंडर इत्यादी की सुविधा दी है।
मुस्लिम भाजपा नेता का कहना है कि भाजपा अपनी हर रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए हर तरह से कोशिश करती है। जिन मुसलमानों की कोई बात नहीं करता था आज भाजपा उन्हें आगे बढ़ाने में जुटी है। पसमांदा समाज के मुसलमान दानिश आजाद अंसारी को यूपी की योगी कैबिनेट में जगह दिलाई। दानिश जिस जाति से आते हैं, उनकी संख्या यूपी में काफी है। ये पिछड़े वर्ग मुसलमान हैं। ऐसे में भाजपा ने दानिश आजाद के माध्यम से पिछड़े वर्ग के मुसलमानों को साथ जोड़ने की उम्मीद जताई है। इसी तरह गुलाम अली खटाना को जम्मू कश्मीर से राज्यसभा सांसद के लिए नामित किया है। गुलाम जिस खटाना जाति से हैं, उस जाति के लोग पहाड़ों पर भेड़-बकरी चराने का काम करते हैं। गुलाम अली के जरिए भाजपा ने पिछड़े मुसलमानों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है। बता दें कि लोकसभा की 543 सीटों में से करीब 100 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदातों की संख्या 20 प्रतिशत से अधिक है। यानी, इस सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं और ये मुस्लिम मतदाता भाजपा के साथ जुड़ते है तो ऐसी कई सीटों पर भाजपा का लाभ हो सकता है।

