मेरठ। विधानसभा चुनाव में उप्र सहित चार राज्यों की सत्ता में वापसी करने वाली भाजपा अपनी सफलता में दलित वर्ग के समर्थन को मान रही है। भाजपा अब सवर्णो और उत्तर भारत की पार्टी के टैग से आगे निकलने का प्लान बना रही है। 2024 के लिए भाजपा इसी रणनीति पर आगे बढ़ने की तैयारी में है। जिससे कि वह अब दलित वर्ग की के समर्थन वाली देश की सबसे बड़ी पार्टी बनने की राह पर चल पड़ी है। इसके संकेत भाजपा के 42 वें स्थापना दिवस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने दिए हैं।
भाजपा अपने परंपरागत वैचारिक नेता दीनदयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आगे निकलकर सामाजिक न्याय के प्रतीकों को भी अपनाने की कोशिश में है। इसी के तहत पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी आह्वान पर भाजपा कार्यकर्ता अब अगले 15 दिनों तक देश में सामाजिक न्याय पखवाड़ा मनाएंगे। बता दें कि आने वाले दिनों में महात्मा ज्योतिबा फुले और बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती है। इन दो महापुरुषों की जयंती को भाजपा सामाजिक न्याय पखवाड़ा के रूप में मनाएंगी।
Read also: शिवपाल के सहारे चरखा दांव की जमीन तैयार कर रही भाजपा, सपा को झटका देने की तैयारी
पीएम मोदी के वक्तव्य से भाजपा की आगे की प्लानिंग भी साफ हो गई है। कभी बसपा दलितों का कैडर वोट पार्टी होती थी। लेकिन अब बसपा उप्र बेहद कमजोर हो चली है। कांग्रेस की स्थिति खराब होने से दलित वोटों पर भाजपा ने अपनी दावेदारी बढ़ा दी है। 2022 के अंत में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव हैं। इसके बाद मप्र, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। इन 5 राज्यों में दलित मतदाताओं की अच्छी खासी आबादी है। इसी के मद्देनज़र अब भाजपा अंबेडकर और महात्मा ज्योतिबा फुले की विरासत पर दावा करके लंबे दौर की सियासत पर चल पड़ी है।
बता दें कि पीएम राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री करने के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पहचान पिछड़े और दलित वर्ग से जोड़ना की कोशिश शुरू की थी। यहीं कारण था कि पीएम मोदी अपने अधिकतर भाषणों में बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर और महात्मा ज्योतिबा फुले का जिक्र करते रहे हैं। मोदी की इस रणनीति का असर भाजपा को यूपी में 2014, 2017, 2019 के बाद अब 2022 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला।
दलित वर्ग का समर्थन इसके अलावा देश के अन्य प्रातों में भी भाजपा को मिला। जिससे भाजपा काफी उत्साहित है और अब 2024 के आम चुनाव में भाजपा इस दलित समर्थन को अपने पक्ष में भुनाना चाहती है।

