देश की शीर्ष अदालत ने बिलकिस बानो मामले में दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया। बता दें कि 2002 में बिलकीस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या के लिए दोषी ठहराए गए 11 लोगों की जल्द रिहाई को चैलेन्ज किया गया था। इन सभी 11 दोषियों को अपराध के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। लेकिन गुजरात सरकार की छूट नीति के तहत पिछली 15 अगस्त को इन सभी को केंद्र सरकार की अनुमति से गोधरा की उप जेल से रिहा कर दिया गया था. बता दें कि बिलकीस के साथ जब सामूहिक बलात्कार हुआ था वो गर्भवती थी, उसके सामने ही उसके परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी गयी थी जिसमें उसकी तीन साल की बेटी भी थी. इन दोषियों की रिहाई पर काफी हंगामा भी हुआ.
बिलकीस ने यह दी थी दलील
बिलकिस बानो ने शीर्ष अदालत के मई के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें गुजरात सरकार को छूट नियमों को लागू करने की अनुमति दी गई थी। दलील में कहा गया है कि चूंकि केस महाराष्ट्र में चला था इसलिए इन दोषियों पर गुजरात की छूट नीति लागू नहीं की सकती। इस मामले में महाराष्ट्र राज्य की छूट नीति को अपनाना चाहिए क्योंकि शीर्ष अदालत ने गुजरात से मुंबई में एक सक्षम अदालत में मुकदमे को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार पर छोड़ा था मामला
बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि जिस राज्य में अपराध होगा,दोषी के आवेदन पर उसी राज्य में विचार किया जा सकता है. चूंकि बिलकिस बानो वाला मामला गुजरात का था इसलिए मामले में दोषियों को अपनी सजा कम करवाने के लिए गुजरात सरकार से अपील करनी चाहिए. शीर्ष अदालत के उस आदेश के बाद ही गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो वाले मामले में सभी दोषियों के लिए रिहाई का फैसला सुना दिया. हालाँकि उससे पहले उसने केंद्र से इसकी अनुमति मांगी थी जो उसे फ़ौरन मिल गयी थी. गौरतलब है कि बिलकीस के दोषियों की रिहाई को गुजरात विधानसभा के चुनावों से जोड़ा जा रहा है.

