General Election 2024: भारत में इस समय महंगाई तेजी से बढ रही है। इस महंगाई का कारण आम चीजों के दामों में वृद्धि बतााई जा रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया है कि गैर-बासमती चावल के निर्यात पर पाबंदी लगाने के सरकार के फैसले का असर भारत के करीब 80 प्रतिशत चावल निर्यात पर पड़ सकता है। घरेलू बाजार में रोजमर्रा की कीमतें थामने के लिए दुनिया का बड़ा निर्यातक भारत अधिकांश चावल की किस्मों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा सकता है।
अल-नीनो प्रभाव के कारण खाद्य महंगाई
ऐसा हुआ तो अल-नीनो प्रभाव के कारण खाद्य महंगाई से जूझ रहे दुनियाभर के देशों में चावल की कीमत और अधिक बढ़ने की संभावना है। वैश्विक चावल निर्यात में भारत की 40 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी है। ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केंद्र सरकार गैर-बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की योजना पर विचार कर रही है। अभी इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं हुई है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार विधानसभा चुनावों और उसके बाद आने वाले साल में लोकसभा चुनाव से पहले देश में अधिक महंगाई के जोखिम से बचना चाहती है।
चावल बुवाई पर असर
खराब मौसम की वजह से प्रमुख उत्पादक राज्यों में चावल बुवाई पर असर पड़ रहा है। इसी कारण से गैर-बासमती चावल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने पर विचार चल रहा है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में खुदरा महंगाई बढ़कर उच्च स्तर 4.81 प्रतिशत पर पहुंच गई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा है कि गैर-बासमती चावल के निर्यात पर पाबंदी लगाने के फैसले भारत के करीब 80 प्रतिशत चावल निर्यात पर असर पड़ेगा। चावल दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रमुख भोजन है। एशिया में वैश्विक आपूर्ति का करीब 90 फीसदी चावल उपभोग के लिए इस्तेमाल होता है।

