कच्छ के एक गांव भुजोड़ी में 500 से अधिक सालों से वानकर बुनकरों का घर है। यहां ऊनी और सूती दोनों प्रकार के हथकरघा पर बनाए जाते हैं। इनके द्वारा बनाए गए भेड़ की ऊन के मोटे कंबल और शाल बेहद गरम होते हैं।
भुजोड़ी नाम गांव अपनी पहचान पूरी दुनिया में बना चुका है। यहां वंदे मातरम मेमोरियल एक ऐसा संग्रहालय है, जिसमें ब्रिटिश राज से लेकर आजादी तक की यात्रा बहुत ही सजीव रूप में दिखाई जाती है। और यही 7 किमी दूर दक्षिण में एक छोटा सा कस्बा है अजरखपुर। यहां 16वीं शताब्दी से ब्लाक प्रिंट का काम करने वाले मुस्लिम खत्री समाज के लोग रहते हैं। इनके द्वारा प्राकृतिक रंग से तैयार ब्लॉक-प्रिंट कपड़े पूरी दनिया में पसंद किए जाते हैं।
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होडका गांव जहां अमिताभ बच्चन के ‘कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में’ का चर्चित वीडियो शूट किया था बेहद सुन्दर गांव है | कच्छ की संस्कृति से सैलानियों को रूबरू करवाने के लिए मिट्टी के गोल घर बनाए गए हैं। यहां आप मिट्टी के शीशे की मीनाकारी वर्क के डेकोरेशन वाले घर में रह सकते हैं। इसके अलावा आप आदिवासी महिलाओं द्वारा तैयार किए गए नफीस कशीदाकारी के कपड़े, चादरें, तोरण आदि भी खरीद सकते हैं।

