नई दिल्ली।ऑस्ट्रेलिया में इस साल होने वाले टी-20 विश्व कप के भविष्य को लेकर लगातार फैसला टालने के लिए आईसीसी से नाराज बीसीसीआई ने उसके चेयरमैन शशांक मनोहर पर जानबूझकर इस मुद्दे पर अपनी टांग अड़ाने का आरोप लगाया है. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के चेयरमैन अर्ल एडिंग्स एक बार फिर 18 अक्टूबर से 15 नवंबर तक होने वाले इस टूर्नामेंट की मेजबानी को लेकर अपने बोर्ड की अक्षमता जाहिर कर चुके हैं और ऐसे में बीसीसीआई का मानना है कि आइसीसी की विलंब की रणनीति आइपीएल की तैयारियों को प्रभावित कर सकती है.
देरी से सभी का नुकसान
बीसीसीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘आइसीसी चेयरमैन (मनोहर) भ्रम की स्थिति क्यों पैदा कर रहे हैं? अगर मेजबान क्रिकेट बोर्ड टी-20 विश्व कप का आयोजन नहीं करना चाहता तो उन्हेंं फैसले की घोषणा करने के लिए एक महीना क्यों चाहिए? यह बीसीसीआइ या आइपीएल का मामला नहीं है. अगर आइसीसी इस महीने टूर्नामेंट को स्थगित करने की घोषणा करता है तो जिन सदस्य देशों के खिलाड़ी आइपीएल का हिस्सा नहीं है वे भी इस दौरान अपनी द्विपक्षीय सीरीज को लेकर योजना बना सकते हैं. फैसला करने में विलंब से सभी को नुकसान होगा.Ó
सितंबर में आईपीएल की तैयारी
आइसीसी अगर जल्द फैसला करता है तो बीसीसीआइ की आइपीएल संचालन टीम संभावित मेजबानों को लेकर तैयारी शुरू कर सकती है जिसमें श्रीलंका भी शामिल होगा, जिसके पास प्रेमदासा, पल्लेकल और हंबनटोटा मैदान हैं. यूएई के मुकाबले श्रीलंका को कम खर्चीले मेजबान के रूप में देखा जा रहा है और सुनील गावस्कर भी कह चुक हैं कि सितंबर में आइपीएल कराने के लिए यह आदर्श देश होगा.
नए नहीं है मतभेद
बीसीसीआइ और मनोहर के बीच मतभेद नए नहीं हैं। नागपुर के वकील मनोहर खुद बीसीसीआइ के अध्यक्ष रह चुके हैं ओर उनके बीसीसीआइ के पूर्व अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन से कटु रिश्ते रहे हैं. अधिकारी ने कहा, ‘वह बीसीसीआइ के पूर्व अध्यक्ष हैं जो हमारे हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं. आइसीसी के राजस्व में देश के योगदान के बावजूद बीसीसीआइ के राजस्व हिस्से में कटौती की गई है.Ó बीसीसीआइ के एक अनुभवी अधिकारी ने कहा, ‘आइसीसी बोर्ड की कुछ बैठक हुईं, लेकिन इनमें ईमेल लीक और जांच को नामांकन प्रक्रिया की घोषणा पर तरजीह दी गई. अगर आप मेरे से पूछो तो मुझे यकीन नहीं है कि मनोहर चेयरमैन का पद छोड़ेंगे और तीसरे कार्यकाल का प्रयास नहीं करेंगे.Ó आइसीसी चेयरमैन दो साल के तीन कार्यकाल तक अपने पद पर रह सकता है. आइसीसी के बोर्ड सदस्यों को डर है कि नामांकन प्रक्रिया में देरी से सर्वसम्मत उम्मीदवार को चुनने में दिक्कत हो सकती है.

