मेरठ। उप्र में हर तरह का चुनाव और उसके नतीजे बहुत दिलचस्प होते हैं। हर चुनाव के नतीजे प्रदेश में राजनीतिक महौल बनाने का काम करते हैं। प्रदेश में हर चुनाव नतीजों के नज़रिये से दिलचस्प होता है आज भले ही प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से सिर्फ दो सीटों पर उपचुनाव का परिणाम आया। लेकिन इस चुनाव परिणाम ने ये दिखा दिया कि वोटर मास लीडर को स्वीकार करता है। दोनों ही जगह भाजपा ने चुनाव जीता। वैसे ये हकीकत है कि उपचुनाव का परिणाम उसी के हक में जाता है जिसकी सरकार होती है। यही सब भाजपा के पक्ष में जा भी रहा है।
रामपुर के आजम जब जेल से रिहा हुए तो उन्होंने स्थानीय जनता के सामने सहानूभूति बटोरने के लिए बड़ी—बड़ी बातें की। लेकिन रामपुर की जनता ने भी उस आजम को आज रिजेक्ट कर दिया जिनको अखिलेश यादव पहले अघोषित रूप से कर चुके हैं। सपा सूत्रों की माने तो अगर मुलायम सिंह का दखल नहीं होता तेा अखिलेश अस्पताल में भर्ती आजम खाने को देखने नहीं जाते। खैर बात चुनाव की चल रही है तो आज़म खान की रिहाई के बाद भी स्थानीय लोगों ने उनके साथ सहानुभूति के बावजूद उनके प्रत्याशी को नजरअंदाज कर भाजपा के घनश्याम लोधी को वोट किया। जिसका नतीजा घनश्याम 40 हज़ार से अधिक वोटों से चुनाव जीत गए। घनश्याम लोधी जो चुनाव जीते है वो भी आज़म खान के करीबी है। रामपुर में सपा प्रत्याशी आसिम राजा के प्रचार में आज़म बड़े नेता थे। लेकिन घनश्याम लोधी को पूरा भाजपा संगठन चुनाव लड़ा रहा था। भाजपा सरकार के मंत्री से लेकर खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रचार के लिए आए। यहीं कारण रहा कि आजमगढ़ और रामपुर दोनों जगह पर चुनावी जीत के लिए भाजपा ने राजनीतिक मज़बूती दिखाई। केंद्र और प्रदेश में सरकार होते हुए भी भाजपा ने दोनों सीटों पर पूरी जान फूंक दी।
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दोनों सीटों पर उपचुनाव जीत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “डबल इंजन की सरकार ने उपचुनाव में डबल जीत हासिल कर ली है। इन दोनों उपचुनाव के परिणाम वाकई 2024 के लिए दूरगामी संदेश साबित होंगे। इन उपचुनाव में जीत के बाद अब भाजपा नेता आत्मविश्वास से लबरेज हैं और उनका कहना है कि 2024 में उत्तर प्रदेश में अब 80 से 80 सीटों की ओर पार्टी बढ़ रही है। दिलचस्प यह है कि रामपुर और आजमगढ़ के उपचुनाव में प्रचार के दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव गायब रहे। रामपुर में तो अखिलेश ने प्रत्याशी चयन और प्रचार और पूरा जिम्मा आज़म खान कर छोड़ दिया। जबकि अपनी छोड़ी सीट आज़मगढ़ में अखिलेश यादव एक दिन भी प्रचार के लिए नहीं गए। एक तरह से ये उपचुनाव परिणाम रामपुर में आजम और आजमगढ़ में अखिलेश के लिए इम्तिहान था। रामपुर सीट पर हार का असर आज़म पर अब पड़ेगा। आज़म खान के लिए ये एक एक सेटबैक के रूप में है। यह दिखाने के लिए आपकी उतनी चलती नहीं, जितना दिखाते हैं। जेल से निकलने के बाद आज आजम खान अगर एक जीत दिला देते तो वो एक क़ाबिल नेता और मास लीडर माने जाते। कुछ ऐसा ही सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए भी है।

