जौहर युनिवर्सिटी की दीवारो ज़मीन से निकल रही है आज़म की ईमानदारी!

आर्टिकल/इंटरव्यूजौहर युनिवर्सिटी की दीवारो ज़मीन से निकल रही है आज़म की ईमानदारी!

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शिकंजे में आने से पहले सपा के फायर ब्रांड नेता आज़म खान की ईमानदारी को लेकर सपाई और खान साहब के समर्थक कसमें खाते थे. एक इमेज बनी हुई थी कि आप आज़म खान को घमण्डी, मुंहफट, बेलगाम, विवादित बयानबाज़ी वाला सबकुछ कह सकते हैं लेकिन उनकी ईमानदारी पर शक नहीं कर सकते लेकिन वक्त ने पलटा खाया, आज़म खान पर 80 के लगभग मुक़दमे दर्ज हुए, जिसमें बकरी चोरी जैसे केस भी थे, कहा जा रहा था कि ये राजनीतिक दुश्मनी का खेल है जिसकी सजा आजम खान को मिल रही है लेकिन अब जबकि उनके ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर युनिवर्सिटी पर सरकारी बुलडोज़र चल रहा है तो ईमानदारी के रूप में ज़मीन से चोरी की हुई की मशीने और दीवारों से चोरी की हुई किताबें बरामद हो रही हैं. शायद यही वो ईमानदारी थी जिसे खान परिवार जौहर यूनिवर्सिटी के दरो दीवार में दबाये हुए था. 

किसी ने सही कहा कि जब भी कहीं किसी ख़ास की चीज़ की ज़्यादा बात की जाय तो समझ लेना चाहिए कि वहां पर वो चीज़ मौजूद नहीं है. यही बात आज़म की ईमानदारी को लेकर भी है, अपने को अबतक प्रताड़ित के रूप में पेश करने वाले आज़म खान की जौहर युनिवर्सिटी की ज़मीन से  नगर निगम की चोरी की हुई सफाई मशीनें और मदरसा आलिया की चोरी की हुई नायाब किताबें दीवारों में दफ़्न मिलेंगी शायद ही किसी ने सोचा होगा। हालाँकि मामला तो अभी शुरूआती दौर में है, कुछ छोटे चोर प्रशासन की गिरफ्त में आये जिनसे पूछताछ में आज़म और अब्दुल्ला की ईमानदारी का यह दफ़्न राज़ खुला जो शायद सत्ता पलट के बाद दफनाया गया होगा। 

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अभी तो इसपर सियासत चलेगी, कोर्ट में बात पहुंचेगी, और जब ईमानदारी बात निकली है तो फिर दूर तलक जाएगी भी. शायद जेल की सलाखों तक, क्योंकि मामला तो अभी ज़मानत पर ही है और वो भी सशर्त, न्यायधीशों के सामने जब ईमानदारी के ये किस्से पहुंचेंगे जिन्हें जौहर युनिवर्सिटी से खोदकर निकाला गया है तो वो क्या निर्णय लेंगे लोग आसानी से समझ सकते हैं. अभी देखना है इस मामले पर आज़म एंड फैमिली अपना बचाव कैसे करेगी? जो पकड़े गए हैं उन्होंने तो मौकए वारदात की शिनाख्त भी कर दी है, माल भी बरामद कर लिया गया है तो बात सिर्फ कानूनी तौर पर साबित करने की रह गयी है. 

बड़ा चर्चा था जौहर विश्विद्यालय का, बल्कि आज़म के देश का दूसरा सर सय्यद बनने का. मगर यह तो सर सय्यद का सरासर अपमान है, अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का इतिहास जानने वालों को मालूम है कि AMU को खड़ा करने में सर सय्यद को कितना संघर्ष करना पड़ा. लम्बी कहानी है. लेकिन आज़म खान ने तो दूसरा सर सय्यद बनने के लिए किन किन हथकण्डो का सहारा लिया, कैसे लोगों से ज़बरदस्ती ज़मीने छीनीं मामूली मुआवज़ा देकर, सबकुछ खुलकर सामने आ गया है. लेकिन अब जो कुछ सामने आया है उसने तो शिक्षा के इस सदन को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। कितनी गलत नींव पर खड़ी की गयी है जौहर यूनिवर्सिटी। जब ईमारत की बुनियाद इस तरह रखी गयी हो वहां शिक्षा कैसी दी जा रही होगी, यह भी बड़ा सवाल है. इस मामले में आगे क्या होगा यह तो आगे ही पता चलेगा लेकिन इतना ज़रूर है कि अभी जौहर यूनिवर्सिटी की दर और दीवारों में आज़म खान की ईमानदारी के शायद बहुत से राज़ छुपे हुए हैं जो धीरे धीरे ही सही, बाहर ज़रूर आएंगे.

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