चीता दर्शन: बधाई पर बधाई

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज जन्मदिन है, संयोग से बेरोज़गार दिवस भी. खैर इन दोनों के संयोग से आज देश में एक ऐतिहासिक काम हुआ. पीएम मोदी अब जो भी करते हैं ऐतिहासिक ही करते हैं।  तो प्रधानमंत्री मोदी ने आज अपने जन्मदिन और बेरोज़गार दिवस को यादगार मनाने के लिए नामीबिया से चीते मंगवाकर भारत के जंगलों को आबाद कर दिया। चीते जो भारत से विलुप्त हो चुके थे लगभग सात दशक पहले, शायद 1952 से. नामीबिया से मंगवाए गए चीतों को प्रधानमंत्री मोदी के कर कमलों द्वारा मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में छोड़ दिया गया है और अब वह जंगल में विचरण कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री मोदी चीता शिफ्टिंग के इस मौके पर एक हंटर और फोटोग्राफर के मिले जुले भेस में में नज़र आये. चीतों को पिंजरों से आज़ाद करने के बाद उन्होंने स्वयं एक कुशल फोटोग्राफर की तरह नामीबियाई चीतों को जो आज से भारतीय बन गए हैं की यादगार तस्वीरें अपने कैमरे में कैद कीं. कैमरे से तो वैसे भी मोदी जी का काफी पुराना नाता है, तब से जब बहुत कम लोग ईमेल के बारे में जानते थे, अडवाणी जी की फोटो खींच कर मेल किया करते थे. इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने इसे ऐतिहासिक पल बताते हुए कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि पिछले 70 सालों में चीतों के पुनर्वास का कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ. खैर सार्थक प्रयास की बात कहकर उन्होंने इस बात को ज़रूर माना कि पहले भी इसके प्रयास हो चुके हैं. 2009 में तब यूपीए सरकार थी. कांग्रेस वालों ने कल से ही इस बात की जानकारी लोगों को देनी शुरू कर दी थी, कांग्रेस को मालूम था कि मोदी उनके शासनकाल के प्रयासों को जो भले ही सार्थक न हुए हो, गोल कर जायँगे, इसीलिए प्रधानमंत्री जी ने सार्थक प्रयास की बात कहकर कांग्रेस को या यूपीए को डिस्क्रेडिट करने की कोशिश की. 

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वैसे देश के जंगलों में संतुलन को देखते किसी भी जंगली जानवर का विलुप्त होना सही नहीं माना जाता, सात दशक बाद ही सही चीतों का पुनर्वास होना एक अच्छी बात है, जो जानकारी मिल रही है उसके हिसाब से पांच नर चीते और तीन मादा हैं, एक्पर्ट्स के अनुसार इनकी आबादी बढ़ने में 20- 25 साल का समय लग सकता है. वैसे तो दावा किया जा रहा है कि इन नामीबियाई चीतों के आने से आसपास के लोगों का जीवन सुधर जाएगा मगर फिलहाल 24 गावों को इस इलाके से हटा दिया गया है, कहा तो जा रहा है कि अच्छी सुविधाओं के साथ बसाया जा रहा है मगर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस बात में कोई सच्चाई नहीं है. हो सकता है आगे जाकर कुछ ऐसा हो मगर अभी तो मुफलिसी ही है. 

देश के मीडिया चैनलों की तो आज पौ  बाहर है, उन्हें एक साथ दो दो इवेंट मिल गए TRP बढ़ाने के लिए. प्रधानमंत्री मोदी जी का जन्मदिवस तो उनकी प्राथमिकता की सूची में था ही मगर आज लोगों को चीता दर्शन कराकर टीवी चैनलों को TRP पाने का डबल मौका मिल गया. प्रधानमंत्री जी को बधाई उनके जन्म दिन की भी और भारत को चीतों से फिर से आबाद करने के लिए भी. बेरोज़गार दिवस हम अगले साल भी मना सकते हैं. चीता दर्शन हर साल संभव नहीं, दर्शन का मतलब देखना नहीं बल्कि जानकारी वाले दर्शन की मैं बात कर रहा हूँ जिसका ज्ञान आज पूरा देश टीवी जगत से प्राप्त कर रहा है, छोटी बड़ी ऐसी कोई जानकारी नहीं जो बांटी न जा रही हो. सोशल मीडिया पर भी मुन्ना भाई लगे हुए हैं चीते पर ज्ञान बांटने में. देश के लिए सचमुच में यह ऐतिहासिक पल है, क्योंकि चीतों के आगे बेरोज़गारी की क्या बिसात है.

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