मेरठ। विधानसभा चुनाव में अब साधु संत भी बयानबाजी करने पर उतर आए हैं। जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी ने अब ब्राहमणों को लेकर बड़ा बयान दिया है। यतींद्रानंद गिरी ने मेरठ में भाजपा सरकार में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रहे सुनील भराला के आवास पर कहा कि ब्राहमणों का भाजपा सरकार में अपमान हो रहा है। सरकार में ही नहीं भाजपा संगठन में भी ब्राहमणों की उपेक्षा की जा रही है। महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि महाराज ने कहा कि इससे पहले अन्य पार्टियां भी ब्राहमणों को अपमानित करने का काम कर चुकी हैं। गिरी महाराज ने कहा कि जाट नेताओं के दबाव में आकर ही भाजपा ने पूरे पश्चिमी उप्र में 21 जाटों को टिकट देकर भाजपा ने साबित भी कर दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा अगर ब्राहमणों की हितैषी है तो क्यों किसी ब्राहमण को वेस्ट में एक भी टिकट नहीं दिया। उन्होंने कहा कि ब्राहमणों की यह अनदेखी भाजपा के लिए भारी पड़ेगी।
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यतींद्रानंद गिरी ने कहा कि उप्र में बाह्रमणों की संख्या 18 प्रतिशत है ऐसे में इसको किसी पार्टी नजरअंदाज नहीं कर सकती। जिसने भी इस समाज की उपेक्षा की वहीं सत्ता से बेदखल हुआ। कांग्रेस से लेकर सपा तक इसके उदाहरण हैं। इतिहास उठाकर देख लिया जाए। केंद्रीय गृहमंत्री अमितशाह के साथ जाट नेताओं की बैठक पर उन्होंने सवाल उठाए। कहा कि क्या गृहमंत्री अमितशाह ब्राहमण समाज के साथ बैठक नहीं कर सकते। जाटों के वोटों के लिए उन्होंने पूरी मेहनत की है। जबकि ब्राहमण समाज को दरकिनार कर दिया गया है। महामंडलेश्वर ने कहा कि अगर ब्राहमण समाज भाजपा से अलग हुआ तो भाजप का बुरा हाल होगा। उन्होंने कहा कि ब्राहमण होने के नाते भाजपा को सुनील भराल को टिकट देना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। महामंडलेश्वर ने कहा कि अब भाजपा में भी जाट,गुर्जर,दलित और वैश्यों की बातें हो रही है। ऐसे में ब्राह्मण कहां जाएगा यह अब समाज को तय करना है। उन्होंने कहा कि ब्राहमण कहता नहीं है बस करता है और जब वह करता है तो उसका परिणाम सबसे सामने होता है। महामंडलेश्वर ने उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पर भाजपा ने संतों का अर्शिवाद लिया तो फिर से वहां पर भाजपा की सरकार 2017 में बनी थी। अब ऐसे ही 2022 में होगा। जिसे भी ब्राहमणों का और संतों का अर्शिवाद मिला उसी को सत्ता सुख भोगने को मिला।

