स्वामी और दारा से आगे और भी हैं बीजेपी की मुश्किलें

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स्वामी और दारा से आगे और भी हैं बीजेपी की मुश्किलें

  • लगातार बढ़ेगा दबाव, रार भरा होगा टिकट बंटवारा
  • आसान नहीं होगा पुराने विधायकों का टिकट काटना, अपना दल ने भी बढ़ाया दबाव

ऊषा सिंह

बीजेपी की मुश्किल सिर्फ स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चौहान के जाने तक  ही सीमित नहीं है। विधान सभा चुनाव से पहले ये मुश्किलें और बढ़ेंगी। कई और  नेताओं के जाने की चर्चाएं अभी तेज हैं। इसी  बीच सबसे बड़ी मुश्किल टिकट बंटवारे  को लेकर बढ़ गई है। संकट के इस समय में अपना  दल ने दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। वहीं अपनी ही पार्टी के बुजुर्ग नेताओं  और  पुराने विधायकों का टिकट काटना आसान नहीं होगा। वे भी दूसरी पार्टी में भागेंगे।

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दरअसल, जो रणनीति पिछली बार बीजेपी ने अपनाई थी, उसी राह पर सपा मुखिया अखिलेश यादव चल रहे हैं। बीजेपी ने अपना दल, सुहैलदेव भारतीय समाज पार्टी जैसी छोटी पार्टियों को साथ लेकर जातीय समीकरण साधे थे। इसी तरह बीएसपी सहित अन्य पार्टियों से पिछड़ा वर्ग के नेताओं को  अपनी ओर लिया था। इससे ओबीसी वोट बैंक पर कब्जा करके अपनी सरकार बनाई। अखिलेश यादव ने भी इसी  योजना के तहत इस चुनाव से पहले छोटे-छोटे दलों से समझौता किया। राम अचल राजभर, लालजी वर्मा जैसे नेताओं को अपने साथ मिलाया। अब स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह चौहान जैसे  नेता उनके खेमे में शामिल हो गए।

जब भी एक पार्टी कुछ कमजोर दिखती है और दूसरी ओर संभावना दिखती है तो उसी ओर सभी भागने लगते हैं। यहां सबसे अहम ये हो जाता है कि हर नेता पार्टी से पहले अपनी लम्बी राजनीति के बारे में सोचता है। ओबीसी नेताओं को पता है कि वो सिर्फ भाजपा के सवर्ण वोटर से नहीं जीत सकते। उनका असल वोट बैंक उनका अपना बेस वोटर है। उसे वह किसी कीमत पर नहीं छोड़ना चाहता। ज्यादातर ओबीसी नेता सपा में जा  चुके हैं। ऐसे में बचे हुओं को भी संकट नजर आ रहा है। उनको लग रहा है कि कहीं उनका ओबीसी वोटर ही  उनसे नाराज न हो  जाए। विधान सभा क्षेत्र के समीकरण भी उनको ध्यान में  रखने होते  हैं। इन्हीं वजहां से वे बीजेपी छोड़कर सपा में जा रहे हैं।

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सुहैलदेव समाज पार्टी के ओम प्रकाश राजभर पहले ही बीजपी छोड़ चुके हैं। अब दूसरी सहयोगी पार्टी अपना दल(एस) ने दबाव बनाना  शुरू कर दिया है। स्वामी प्रसाद मौर्य और दारा सिंह के पार्टी छोड़ने पर अपना दल के आशीष पटेल का बयान इस प्रेशर पॉलिटिक्स की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा है कि इनका पार्टी छोड़कर जाना दुखद है। पार्टी को नेताओं  का सम्मान करना चाहिए। ऐसा करके अपना दल टिकटों के लिए तय तोड़ करेगा। इससे बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी होगी। वहीं बीजेपी 70 पार के नेताओं और ऐसे पुराने विधायकों का टिकट काटने की  सोच रही है जिनकी क्षेत्र में अच्छी छवि नहीं है। यदि ऐसा करती है तो वे भी पार्टी छोड़ने की धमकी देंगे। इनमें से कुछ छोड़कर दूसरी पार्टी में जा सकते हैं। दूसरी पार्टी का टिकट न मिला तो भी बगावत करके कुछ वोटों का नुकसान करवा सकते हैं। कुल मिलाकर चुनाव से पहले बीजेपी के लिए टिकट बंटवारा बहुत मुश्किल होने जा रहा है।

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