भाजपा के पिछड़ों पर सपा की नजर, मौर्या-शाक्य-सैनी-कुशवाहा बन सकते हैं वरदान

उत्तर प्रदेशभाजपा के पिछड़ों पर सपा की नजर, मौर्या-शाक्य-सैनी-कुशवाहा बन सकते हैं वरदान

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भाजपा के पिछड़ों पर सपा की नजर, मौर्या-शाक्य-सैनी-कुशवाहा बन सकते हैं वरदान

लखनऊः यूपी विधानसभा चुनाव से पहले दल बदलने का कार्यक्रम चल रहा है। बीजेपी के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य से शुरू हुआ दल बदलने का कार्यक्रम अब बड़े स्तर पर चलने लगा है और बीजेपी के कई बड़े-छोटे नेता बीजेपी का साथ छोड़कर सपा का दामन थामने लगे हैं।

बीजेपी के लिए वरदान बने थे मौर्या, शाक्य, सैनी और कुशवाहा

दरअसल यूपी में OBC में मौर्या, शाक्य, सैनी और कुशवाहा जाति की आबादी लगभग 5 फीसदी है, लेकिन सूबे के 13 जिलों का वोट बैंक 10 से 15 फीसदी है। BJP ने केशव प्रसाद मौर्य को 2017 के चुनाव में आगे कर और स्वामी प्रसाद मौर्य को जोड़कर यूपी में मौर्या, और शाक्य, सैनी, कुशवाहा जाति के 90 फीसदी वोटों को हासिल किया था।

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बीजेपी के कोर वोटरों पर सपा की नजर

अब 2022 के चुनाव में बीजेपी के इस वोट बैंक को सपा अपने साथ जोड़ने की कवायद में है, जिसके लिए अखिलेश यादव ने बीजेपी के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य को अपने पाले में ले लिया है। इतना ही नहीं केशव देव मौर्य की पार्टी महान दल के साथ गठबंधन किया है। इसके अलावा बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे आरएस कुशवाहा को भी सपा ने अपने साथ जोड़ा है, जो इस बात का संकेत दे रहा है कि सपा की नजर मौर्या-शाक्य-सैनी और कुशवाहा वोट बैंक पर है। ऐसे में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की नजर मौर्या-कुशवाहा, नोनिया, राजभर, जाट, कुर्मी, ब्राह्मण, चौहान और पासी समुदाय के वोट बैंक पर बनी हुई है।

सपा अपना रही BJP का सियासी फॉर्मूला

बता दें कि यूपी में 05 साल पहले BJP ने 15 साल के सत्ता के वनवास को खत्म करने के लिए सवर्ण समाज और ओबीसी-दलित समुदाय के कुछ जातियों को मिलाकर सोशल इंजीनियरिंग बनाई थी। BJP का ये सियासी फॉर्मूला सफल भी रहा था। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की इसी सोशल इंजीनियरिंग में अखिलेश यादव सेंध लगाकर यूपी की सत्ता में वापसी की जद्दोजहद कर रहे हैं। अखिलेश यादव की नजर बीजेपी के उन सभी वोट बैंक पर है, जिनके सहारे वो 2017 के चुनाव में 312 सीटें जीतकर सत्ता में आई थी।

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बीजेपी के कई नेता छोड़ चुके दामन

2022 चुनाव में समाजवादी पार्टी अलग-अलग जातियों को साधने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। अखिलेश यादव जातीय आधार वाले दलों के साथ गठबंधन करने से लेकर विपक्षी दलों के नेताओं को अपने साथ मिलाने में जुटे हैं। अब तक बीजेपी के कुल 09 विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं। जिसमें स्वामी प्रसाद मौर्य, मंत्री दारा सिंह चौहान, रोशन लाल वर्मा, बृजेश प्रजापति, राकेश वर्मा, विनय शाक्य, जय चौब, माधुरी वर्मा और आरके शर्मा शामिल हैं और जल्द मंत्री धर्मपाल सिंह सैनी के भी बीजेपी छोड़ने की चर्चा है।

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