‘मेरठ’ को चाहिये ‘लठ्ठमार-लॉकडाउन’

आर्टिकल/इंटरव्यू‘मेरठ’ को चाहिये ‘लठ्ठमार-लॉकडाउन’

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‘मेरठ’ को चाहिये ‘लठ्ठमार-लॉकडाउन’

रंजीता सिन्हा

मेेरठ। पश्चिम उत्तर प्रदेश का जिक्र हो और मेरठ का नाम न आये, ऐसा भला कहां हो सकता है। यहां चंडी देवी का मंदिर, बाले मियां और शाहपीर साहब की दरगाह आस्था के उन स्थलों में से हैं जहां पहुंच कर मन को बड़ा सुकूं मिलता है। वैसे भी यह शहर भारत में खेल के सामान और संगीत वाधयंत्रों के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक मकबरों की वास्तुकला देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। लेकिन… अपनी इस छवि के विपरीत इन दिनों जहां हर कोई जानलेवा महामारी से बचने की पुरजोर कोशिश में है वहीं यहां तमाम ऐसे भी जिनकी निरन्तर बद्मिजाजी, बेअंदाजी की तस्वीरें सामने आ रहीं हैं। सभी इस फेहरिस्त में नहीं हैं, पर अधिकांश हैं जो बगैर मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के इस लॉकडाऊन में भी अपनी मौत (कोरोना) से कबड्डी खेलने को आमादा हैं।

‘मेरठ’ को चाहिये ‘लठ्ठमार-लॉकडाउन’
खैरनगर दवाई मार्किट में भीड़ का आलम

इस शहर के तमाम लोगों का ऐसा करना न केवल बेवकूफाना है बल्कि बचकाना भी। एक ओर जहां आम लोग ऑक्सीजन, इंजेक्शन, इलाज के अभाव में परेशान हैं, दम तोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई मेरठवासी अपनी जान के साथ-साथ अपनों की और दूसरे नागरिकों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। असल में पुलिस और प्रशासन भी बीते साल के मुकाबले इस बार सख्ती इसलिए कम किये हुए क्योंकि लोग वैसे ही मौजूदा हालातों से हलकान-परेशान हैं। लेकिन, उन बिगड़ैलों का क्या जो लॉकडाउन के निर्देशों को नहीं बल्कि लाठी की भाषा को ही समझते हों?  ऐसे बेअंदाज लोगों का इलाज ही ‘लठ्ठमार लॉकडाउन’ है।

‘मेरठ’ को चाहिये ‘लठ्ठमार-लॉकडाउन’
लॉकडाउन के दौरान शहर कबाड़ी बाजार में भीड़ से लगा जाम

ताजा हकीकत यह है कि, कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर भले इन दिनों चरम पर हो, और अकेले मेरठ में ही फिलवक्त सरकारी आंकड़ों के हिसाब से 660  से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी हो, गैरसरकारी तौर पर मानना है कि संख्या कहीं ज़्यादा है, मेरठ में पिछले हफ्ते से कोरोना संक्रमितों की संख्या पूरे प्रदेश में सबसे ज़्यादा दर्ज हो रही है, पर कुछ लोग हैं कि मानते नहीं। यहां का आम दृश्य तो यही कहता है कि, मास्क लगाना मेरठ वालों की शान में गुस्ताखी है। तभी तो मास्क न लगाने पर लाख से ज्यादा लोगों के चालान कट चुके हैं और 3 करोड़ से ज्यादा का शमन शुल्क वसूला जा चुका है। इतना ही नहीं, अभी तक महामारी फैलाने, सड़क पर जहां-तहां थूकने और बाकी बेजा हरकतों को लेकर 7 हजार से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

‘मेरठ’ को चाहिये ‘लठ्ठमार-लॉकडाउन’
मास्क लगाना मेरठ वालों की शान में गुस्ताखी है

मालूम हो कि, कोरोना की दूसरी लहर के मद्देनजर जिले में 22 मार्च से ही सख्ती कर दी गई थी। स्थानीय पुलिस-प्रशासन मास्क को लेकर लगातार अभियान भी चला रहे हैं। चालान भी कट रहे हैं और चेकिंग भी चल रही है। पर तमाम लापरवाह हैं कि मानते नहीं। मंडियों, बाजारों में मानों मेला लगा हो, सड़कों पर भी गाडिय़ां फर्राटा भर रहीं हैं। ई-रिक्शा हो पैडल रिक्शा वाले, पुलिस पकड़ती है तो उल्टा ये खाकीधारियों से ही भिड़ पड़ते हैं। असल में इन्हीं बद्मिजाज लोगों की लापरवाही के कारण ही यहां संक्रमण तेजी से फैलना शुरू हो गया था।

‘मेरठ’ को चाहिये ‘लठ्ठमार-लॉकडाउन’
शहर नवीन मांडी में भीड़

मेरठ पुलिस के दर्ज रिकार्ड का ब्यौरा खंगालें तो पाएंगे कि, शहर में कुल मिलाकर 66 पुलिस थाने-चौकियों की ओर से कोरोना-प्रोटोकॉल का पालन न करने वालों पर कार्रवाई की गई। इसके अलावा 110 स्पॉट पर चेकिंग भी लगायी गई। अनगिनत स्थानों पर रोजाना ही मास्क को लेकर अभियान भी चलाया गया। इतना ही नहीं, महामारी एक्ट के तहत पुलिस ने 7,113 मुकदमे दर्ज किए हैं। सामाजिक दूरी न बनाने और लॉकडाउन, रात्रि कफ्र्यू उल्लंघन में 10 हजार 844 लोगों पर कार्रवाई की की सो अलग।

‘मेरठ’ को चाहिये ‘लठ्ठमार-लॉकडाउन’
बेवजह लॉकडाउन में सड़क पर घुमते लोग

यहां के एसएसपी अजय साहनी के मुताबिक, अभी तक मास्क नहीं लगाने को लेकर पिछले 53 दिनों में एक लाख और एक हजार एक लोगों के चालान किए गए हैं। इन चालान से लगभग तीन करोड़ से ज्यादा का शमन शुल्क भी वसूला गया है।

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