लखनऊः विद्यार्थी सर्वगुण सम्पन्न जनशक्ति बनकर प्रदेश और देश के लिये महत्वपूर्ण योगदान करें। जीवन में विद्यार्थी का लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिये और उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये निरन्तर प्रयास करते रहना चाहिये। क्योंकि कठिन परिश्रम, सहनशीलता, आत्मविश्वास और सकारात्मक मनोवृत्ति से कुछ भी प्राप्त किया जा सकता है। विद्यार्थियों को चुनौतियों और बाधाओं के सामने बिना झुके आगे बढ़ते रहना चाहिये। सफलता तभी मिलती है, जब कार्य को दक्षतापूर्वक पूरा करने की क्षमता हो। यह विचार उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने आज प्रो0 राजेन्द्र सिंह (राज्जू भय्या) विश्वविद्यालय प्रयागराज के तीसरे दीक्षांत समारोह में 1,18,064 विद्यार्थियों को उपाधियां तथा 41 छात्रों को स्वर्ण पदक, 2 छात्राओं को कुलाधिपति पदक तथा 2 छात्राओं को गुलाटी स्वर्ण पदक प्रदान करने के बाद अपने उद्बोधन में व्यक्त किये।
राज्यपाल ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान की सनातन परम्परा तथा मूल्यपरक शिक्षा को बढ़ाने की बात कही गई है। क्योंकि किसी भी देश के विकास में मानव संसाधन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अगर हमारे विश्वविद्यालयों में चरित्रवान व्यक्ति का निर्माण हो तो निश्चित रूप से सामाजिक जीवन के विविध क्षेत्रों में एक मानक और प्रतिमान स्थापित होगा। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के आलोक में विश्वविद्यालयों ऐसे पाठ्यक्रम का निर्माण करें जिससे अध्ययन के लिये विषयो के रचनात्मक संयोजन को सक्षम बनाने में बढ़ावा मिले। राज्यपाल ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन और उच्च स्तरीय सोच से होती है। उन्होंने कहा भारत सरकार द्वारा शिक्षा को प्राथमिकता के आधार पर 2035 तक सकल नामांकन अनुपात 50 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है ताकि अधिक से अधिक लोगों तक उच्च शिक्षा का प्रचार-प्रसार सुलभ हो सकें।

