कृषि कानूनः भ्रमित किसान, तो भ्रम में है सरकार

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कृषि कानूनः भ्रमित किसान, तो भ्रम में है सरकार

किसानों को विश्वास में लेने के मुद्दे पर सरकार भी रही पूर्णतया भ्रमित
किसानों को कृषि कानूनों के लाभकारी पक्ष बता समर्थन हासिल करना जरूरी

सुनील शर्मा

न्यूज डेस्क। कृषि कानूनों को लेकर किसानों के भ्रमित होने का दावा करने वाली केंद्र सरकार खुद भ्रम में नजर आ रही है। ऐसे में मंगलवार को कच्छ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह कहना कि किसानों को भ्रमित करने की साजिश चल रही है बेमानी लग रहा है। क्योंकि पूर्व में किए गए एकतरफा फैसले की तरह कृषि कानूनों को लागू करते वक्त शायद केंद्र सरकार का भ्रम यही था कि देश की जनता की तरह किसान भी आसानी मान जाएंगे और फैसले को चुपचाप स्वीकार कर लेंगे। मगर वर्तमान में कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी कानून या योजना कितनी भी अच्छी क्यों न हो, उसे लागू करने से पहले लोगों में विश्वास पैदा करना जरूरी है ताकि भ्रम की स्थिति पैदा न हो। यदि सरकार यह मानती है कि किसान भ्रमित हैं तो एकतरफा कानून लागू करने और किसानों को विश्वास में लेने के मुद्दे पर सरकार भी पूर्णतया भ्रमित रही।

मंगलवार को कच्छ में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन को किसानों को भ्रमित करने की साजिश बताया। पीएम मोदी ने विपक्ष पर भी आरोप लगाया कि जब उनकी सरकार थी तो वह कृषि सुधारों के समर्थन में थे लेकिन अब वह कृषि कानूनों के विरोध में उतर आए हैं। वही पीएम मोदी ने कहा की दूध लेने वाली डेयरियां क्या किसानों की गाय-भैंस का कब्जा कर लेती हैं। पीएम मोदी ने डेयरियों का उदाहरण देकर किसानों को समझाने का प्रयास किया। मगर जाहिर है कि दुग्ध उत्पादन करने और खेती करने वाले किसान में बहुत फर्क है। डेयरियां गाय-भैंसों को इसलिए साथ नहीं ले जा सकतीं क्योंकि गाय-भैंसों का पालन-पोषण करना बेहद मुश्किल कार्य है। किसानों को डेयरियों से अधिक नुकसान इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि उनका हिसाब प्रतिमाह होता है। ऐसे में यदि नुकसान हुआ भी तो एक माह का ही होगा। वहीं खेती करने में किसानों को एक लंबा वक्त लगता है और पूरी खेती एक निश्चित समय में बेची जाती है। जाहिर है कि एक बार की खेती में यदि नुकसान हुआ तो उसकी भरपाई करने में उसे कई साल लग जाएंगे। ऐसे में किसानों की चिंता स्वभाविक है और सरकार का भ्रम सबके सामने है।

पीएम मोदी ने भले ही किसानों का आशीर्वाद अपने साथ बताया हो मगर देश भर में चल रहे किसानों के आंदोलन से यह बात गले नहीं उतरती। पीएम मोदी का विपक्षी दलों द्वारा किसानों को भ्रमित किए जाने की बात सत्य हो भी सकती है मगर क्या कृषि कानूनों को लागू करने से पहले सरकार द्वारा किसानों में व्याप्त भ्रम को दूर करने का कोई प्रयास किया गया था। देखा जाये तो कृषि कानूनों को लागू करने के दौरान अति आत्मविश्वास से भरी केंद्र सरकार खुद भ्रमित रही। पूर्व में भी देश की जनता या विपक्ष को विश्वास में लिये बिना नोटबंदी, जीएसटी जैसे अनेक महत्वपूर्ण फैसले एकतरफा लेने वाली केंद्र सरकार संभवतः इन कृषि कानूनों को भी बिना किसी विरोध के लागू हो जाने की बात सोच कर भ्रमित रही। इस भ्रम में डूबी सरकार ने किसानों को कृषि कानूनों के लाभकारी पक्ष को समझाने का प्रयास नहीं किया। जिसके कारण किसानों में कथित भ्रम बढ़ता चला गया।

हो सकता है कि कृषि कानूनों के लागू होने से किसानों के जीवन में खुशहाली आ जाए। मगर बिना किसान संगठनों को साथ में लिए या किसानों को उनका हित समझाएं बिना कृषि कानूनों को लागू करना निःसंदेह गलत निर्णय था। बेहतर यही होता कि पहले सरकार द्वारा किसानों को कृषि कानूनों के बारे में समझाया जाता, उनमें विश्वास पैदा किया जाता की कृषि कानूनों के लागू होने से उन्हें लाभ होगा और किसानों को किसी भी प्रकार का आर्थिक नुकसान सरकार नहीं होने देगी। सरकार ने और सांसदों-विधायकों ने किसानों को समझाने के प्रयास शुरू भी किए मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी और किसानों में कृषि कानूनों को लेकर विरोध शुरू हो चुका था। यदि पूर्व में राजनीतिक दल कृषि कानूनों के समर्थन में थे तो उन्हें भी कृषि कानूनों को लागू करने से पहले साथ में लिया जाना चाहिए था जिससे उनको कृषि कानूनों का विरोध करने का अवसर नहीं मिलता। मगर कृषि कानूनों को लागू करने और इसका क्रेडिट पूरी तरह से खुद ही लेने की मंशा के चलते केंद्र सरकार ने विपक्षी दलों के साथ इस कानून को लेकर सहमति बनाने का प्रयास भी नहीं किया। इस भ्रम का नतीजा आज पूरा देश देख रहा है और इसका दुष्परिणाम आम जनता भी भुगत रही है जो आज किसान आंदोलनों के चलते सड़क पर चलते हुए भी डर रही है।

बेहतर यही होगा कि सरकार हठधर्मिता से छोड़ें और कृषि कानूनों को फिलहाल लागू करने से रुक जाए। सरकार को चाहिए कि वह किसानों के साथ देश की आम जनता को भी इन कृषि कानूनों को लागू करने के कारण, इनको लागू होने के बाद किसानों को मिलने वाले लाभ के बारे में विस्तार से और स्पष्ट रूप से बता कर उनका समर्थन हासिल करें। ताकि न किसान भ्रमित हो और न ही सरकार भी किसी भ्रम में रहे। क्योंकि जनता ही सरकार को बनाती है मगर सरकार जनता को नहीं बना सकती।

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