लखनऊ। Supreme Court – सुप्रीम कोर्ट के पदोन्नति में आरक्षण पर दिये गए फैसले के बाद आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने आंकड़ा जारी कर कहा है कि उच्च पदों पर भागीदारी लगभग शून्य है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अनुसूचित जाति और जनजाति को प्रमोशन में आरक्षण दिये जाने मानदंड में कोई छूट नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने राज्यों के पाले में गेंद को डालते हुए कहा है कि एससी-एसटी के खाली पदों का डाटा निकालकर आरक्षण नीति पर फिर से विचार करना चाहिये। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने मोर्चा संभाल लिया है। समिति ने विभिन्न विभागों के उच्च पदों पर एससी-एसटी की भागीदारी का आंकड़ा जारी करते हुए कहा कि सरकार इस मामले में लापरवाही कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार खुद को दलितों और पिछड़ों का हितैषी बताती है लेकिन दस साल से 117वां बिल लोकसभा में लंबित है, उसको पारित नहीं करवा रही है। समिति ने मोदी सरकार से अपील कर कहा है कि अध्यादेश लाकर इसको कानून बनाया जाए और राज्यों को बाध्यकारी करते हुए लागू किया जाए।
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आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने शनिवार को संयोजक मंडल की बैठक की। इस दौरान संयोजक अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि सरकार के साथ दूसरे राजनीतिक दलों को भी इस पर मुखर होकर आगे आना होगा। जब ईडब्ल्यूएस कानून दस मिनट में लागू हो सकता है तो प्रमोशन में आरक्षण का बिल क्यों लटका हुआ है। हमें किसी से कोई परेशानी नहीं है लेकिन संवैधानिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अकेले यूपी में आठ लाख आरक्षित वर्ग के कार्मिक हैं। ऐसे में हमारी राजनैतिक दलों से मांग है कि प्रमोशन में आरक्षण दिये जाने का मामला वो अपने घोषणापत्र में लागू करें। जो भी दल हमारी अनदेखी करेगा, हम उसकी सरकार नहीं बनने देंगे। अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पूरे प्रदेश का आठ लाख आरक्षित वर्ग का कार्मिक, उसका परिवार और रिश्तेदार एकजुट होकर सौ फीसदी मतदान करेगा। इसको लेकर हमने बैठकें की हैं और सबको स्पष्ट निर्देश दिया है कि वोट की चोट करने के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि कार्मिक पढ़े-लिखे और अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं, इस बार आरक्षण समर्थक सरकार ही बनायेंगे। उन्होंने कहा कि देखा जाए तो आठ लाख आरक्षण समर्थक कार्मिकों के पास परिवार और रिश्तेदार मिलाकर 40 लाख से ज्यादा का वोटबैंक है, ऐसे में राजनीतिक दलों के पास यह मौका है, कि हमारे मुद्दे को अपने घोषणापत्र में लाकर हमारा एकमुश्त वोट पा ले।
85 बनाम 15 की बात करने वाले चेहरे से नकाब हटायें
अवधेश कुमार वर्मा ने साफ कहा कि इस बार हम अपने निर्णय से टस से मस नहीं होने वाले हैं। सिर्फ राजनीतिक मंचों से 85 बनाम 15 की बात कहने से हम खुश नहीं होने वाले हैं। अब राजनीतिक दलों को अपने चेहरे से नकाब हटाना होगा और दलितों व पिछड़े वर्ग के कार्मिकों के हितों पर अपना एजेंडा साफ करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रमोशन में आरक्षण का नियम दलितों के साथ पिछड़ों के लिए भी लागू करें। अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि समिति की ओर से यूपी की सभी सुरक्षित विधानसभा 86 सीटों पर एक कमेटी गठित की गई है। जिसमें पांच आरक्षण समर्थक कार्मिक हैं। ये वहां के प्रत्याशियों का आंकलन कर रहे हैं और साथ ही दलों के एजेंडे पर नजर रख रहे हैं। ऐसे में अगर कोई भी आरक्षण के मुद्दे से दूर होता दिखाई देता है तो हम सब मिलकर उसके खिलाफ वोटिंग करेंगे।
रिटायर्ड कर्मियों की लेंगे मदद
संषर्ष समिति ने एक और ऐलान करते हुए कहा कि लाखों की संख्या में आरक्षित वर्ग के रिटायर्ड कार्मिक हैं। उनकी भी मदद ली जाएगी। उन्हें हर घर जाओ, अलख जगाओ अभियान की जिम्मेदारी दी जाएगी। ये लोग एकजुट होकर वोट के लिए लोगों से अपील करेंगे। जिससे कि वोटों के बंटवारे पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। समिति ने कहा कि जब तक दलितों और पिछड़ों के लिए पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था बहाल नहीं हो जाएगी, तब तक लड़ाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद फिर जारी किये आंकड़े
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकारें एससी-एसटी के लिए पदों का आंकड़ा जारी करें और उसके बाद जब जरूरत हो तो पदोन्नति में आरक्षण को लागू करें। संघर्ष समिति ने इसके बाद एक बार फिर से यूपी के कृषि, पावर कॉर्पोरेशन, सिंचाई और लोक निर्माण विभाग के ग्रुप ए के लेवल-1 पदों का आंकड़ा जारी किया है। इसमें चौंकाने वाला तथ्य निकलकर आया है कई पदों पर भागीदारी शून्य है।
डिपार्टमेंट पोस्ट स्वीकृत पदों की संख्या एससी-एसटी का प्रतिनिधित्व
विभाग का नाम पदनाम कुल स्वीकृत पद अनु0जाति/जनजाति का प्रतिनिधित्व
बिजली निदेशक/ प्रबन्ध निदेशक 43 शून्य
बिजली मुख्य अभियन्ता स्तर-1/2 116 1
कृषि निदेशक 05 शून्य
कृषि अपर निदेशक 11 शून्य
लोक निर्माण प्रमुख अभियन्ता/मुख्य अभि0 41 शून्य
सिंचाई प्रमुख अभियन्ता /मुख्य अभि0 स्तर-1 16 शून्य
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आरक्षण रूपी संवैधानिक अधिकार को बचाने की लड़ाई
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा के अलावा केबी राम, आरपी केन, अनिल कुमार, एसपी सिंह, हरिश्चंद्र वर्मा, योगेश कुमार, अजय कुमार, श्यामलाल, अंजनी कुमार, प्रेमचंद्र, बिन्दा प्रसाद, एके प्रभाकर, अजय कनौजिया, गजेंद्र, दयानिधि, अशोक सोनकर, राजेंद्र आर्या, सुनील कनौजिया ने कहा है कि अब आरक्षण रूपी संवैधानिक अधिकार की लड़ाई लड़ने के लिए हमें हर हथियार उठाने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि इसीलिए सभी से कहा जा रहा है कि आरक्षण समर्थक सरकार बनायें। करो या मरो की तर्ज पर लोगों को एकजुट करें और अपनी सरकार बनाने में सहयोग करेंगे। इस बार का चुनाव ऐतिहासिक होगा, क्योंकि यहीं से आरक्षण के भविष्य की दशा और दिशा तय होनी है। यहां पर चूक हो गई तो हमारी पीढ़ियों को इसका नुकसान उठाना होगा। आरक्षण विरोधी ताकतों को किसी भी कीमत पर कामयाब नहीं होने देना है और इसे रोकने का सबसे बड़ा माध्यम है कि वोट की चोट करें।

