प्रणव(ॐ) की महिमा के जप का महत्वपूर्ण योग यानी चतुर्दशी आर्द्रा नक्षत्र योग आज 26 जुलाई 2022 को शाम 06:48 से 27 जुलाई प्रातः 04:09 तक रहेगा। सूतजी ने ऋषियों से कहा था कि महर्षियों ! प्र नाम है प्रकृति से उत्पन्न संसार रूपी महासागर का। प्रणव इससे पार करने के लिए नाव है। इसलिए इस ॐ कार को ‘प्रणव’ की संज्ञा देते हैं। ॐकार अपना जप करने वाले साधकों से कहा है कि ‘प्र –प्रपंच, न – नहीं है, व: – तुम लोगों के लिए।’ अत: इस भाव को लेकर ‘ॐ’ को ‘प्रणव’ नाम से जाना जाता हैं। इसका एक दूसरा भाव भी है ‘प्र – प्रकर्षेण, न नयेत, व: -युष्मान मोक्षम इति वा प्रणव:।यानी अर्थात यह सब उपासकों को बलपूर्वक मोक्ष तक पहुँचाने वाला है। इस अभिप्राय से ऋषि-मुनि इसे ‘प्रणव’ कहते हैं। सूक्ष्म प्रणव मंत्र का जप और उसके अर्थभूत परमात्म-तत्त्व का अनुसंधान करता रहता है। जो अर्थ का अनुसंधान न करके केवल मंत्र का जप करते हैं। उसे निश्चय योग की प्राप्ति होती है। जिसने इस मंत्र का 36 करोड़ जप कर लिया उसे अवश्य योग प्राप्त हो जाता है। ‘अ’ शिव है और ‘उ’ शक्ति है और इसमें ‘मकार’ इन दोनों की एकता यह त्रितत्त्वरूप है ओम।
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‘ॐ’ मंत्र का प्रतिदिन मात्र एक हजार जप करने पर सम्पूर्ण मनोरथों की सिद्धि होती है। प्रणव के ‘अ’ , ‘उ’ और ‘म’ इन तीनों अक्षरों से जीव और ब्रम्ह की एकता होता है। भिन्न-भिन्न काल में ‘ॐ’ की महिमा अलग अलग है। आर्दा नक्षत्र से युक्त चतुर्दशी के योग में आज दिनांक 26 जुलाई 2022 को शाम 06:48 से 27 जुलाई प्रातः 04:09 तक किसी भी समय प्रणव का जप किया जाय तो यह अक्षय फल देने वाला माना जाता है।

