Gujarat Chunavi Dangal: क्या अपने विद्रोहियों के सहारे विपक्ष को तोड़ेगी भाजपा

गुजरात चुनावGujarat Chunavi Dangal: क्या अपने विद्रोहियों के सहारे विपक्ष को तोड़ेगी भाजपा

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Gujarat Chunavi Dangal – गुजरात मे जहां इस साल के अंत मे विधानसभा चुनाव होने को है वही अगर हम बात भाजपा की करे तो यह भाजपा का गढ़ कहा जाता है। यहाँ विगत 30 वर्षों से भाजपा की सत्ता पर धाक बनी हुई है और जनता मोदी को विकास के तौर पर आँकती है। वही अगर हम आज भाजपा के राजनीतिक परिदृश्य को समझे तो इसकी रणनीति में कुछ खास परिवर्तन नहीं हुआ है यह आज भी हिंदुत्व के नाम पर वोट लेती है और जनता को अपने दल से जोड़ती है। 

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विपक्ष भाजपा को हराने की काफी कोशिश कर रहा है लेकिन इनके हिंदुत्व मॉडल के सामने सब फेल हो जाता है। लेकिन गुजरात मे इस बार हालात और यहां की हवाएं बदली हुई है। सत्ताधारी भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती गुजरात मे खुद को साबित करना है क्योंकि यह भाजपा का गढ़ कहा जाता है और अगर भाजपा यहाँ से हारती है तो यह भाजपा के अस्तित्व को।सावालो के घेरे में खड़ा कर देगा। 

एक है भाजपा की चिंता:-

अगर हम गुजरात मे भाजपा की चिंता की बात करे तो यहाँ विपक्ष भाजपा के लिए समस्या बन गया है। क्योंकि इस बार गुजरात मे भाजपा के लिए सिर्फ कांग्रेस नहीं अपितु एआईएमआईएम, आम आदमी पार्टी भी मैदान में है और इन सबका उद्देश्य सिर्फ एक है भाजपा को गुजरात की सत्ता से हटाना। वही भाजपा के लिए चिंता की बात यह है कि अगर चुनाव के अंत तक इन दलों में आपसी सहमति बन गई और यह एकजुट हो गए तो भाजपा को गुजरात जीतना मुश्किल हो जाएगा और भाजपा के हाँथ से गुजरात की सत्ता जाना मतलब उसकी रीढ़ का कमजोर होना होगा।

क्योंकि गुजरात अमित शाह और मोदी के लिए वह पायदान है जिसने उनके राजनीतिक करियर में अहम भूमिका निभाई है। मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद से प्रधानमंत्री पद तक का सफर तय किया है और यह गुजरात की जनता से जमीनी स्तर पर जुड़कर राजनीति करते हैं और गुजरात का इनके हाँथ से जाना इनके प्रधनमंत्री पद को काफी प्रभावित कर सकता है।

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भाजपा विपक्ष को एकजुट न होने देने के लिए उनके नेताओ को तोड़ने मे कही न कही इंडिरेक्टली भूमिका में है। अभी हाल ही में कांग्रेस की आपसी कलह का फायदा उठाकर भाजपा ने अपने विद्रोही रहे हार्दिक पटेल को अपने खेमे में कर लिया और अब वह भाजपामय होकर उनका गुणगाण कर रहे हैं। वही अगर हम आप की बात करे तो भाजपा आप मे मची अंदरूनी कलह का फायदा ऊठाकर उसे भी तोड़ने का प्रयास कर सकती है और विपक्ष को जनता से दूर रखने की रणनीति बना सकती है।

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