गुजरात मे विधानसभा चुनाव होने को है हर दल अपनी पार्टी की धाक जमाने के लिए अपनी कमर कस चुका है। वही अगर हम गुजरात के इतिहास की बात करें तो यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफी दबदबा रहा है और इन्हें गुजरात की राजनीति का उम्दा खिलाड़ी माना जाता है। वही भाजपा मोदी को गुजरात की राजनीति में अपने सबसे मजबूत पत्ते के रूप में इस्तेमाल करती है और अपनी विजय का बिगुल फूंकती है।
वही अगर हम नरेंद्र मोदी की बात करें तो इन्होने गुजरात की राजनीति में अहम भूमिका निभाई है यहां यह लगातार तीन कार्यकाल तक मुख्यमंत्री रहे और इन्होंने गुजरात की जनता का खूब दिल जीता। यही से मोदी ने अपने प्रधानमंत्री के पद का सफर तय किया और गुजरात से यह दिल्ली पहुंचे और भारत के प्रधानमंत्री बने। लेकिन इनके जाने के बाद आज तक गुजरात को मोदी का विकल्प प्राप्त नहीं हुआ और कोई भी प्रधानमंत्री मोदी के बाद नहीं हुआ जिसने गुजरात की बागडोर मोदी की भांति संभाली हो।
मोदी के बाद भाजपा को कोई मोदी के जैसा गुजरात के लिए चेहरा नहीं प्राप्त हुआ इस संदर्भ में राजीतिज्ञ विशेषज्ञ जतिन देसाई कहते हैं कि मोदी ने गुजरात की जनता को बांध कर रखा था। यह एक विकासवादी नेता के रूप में जाने जाते थे और इन्होंने जनता को लुभाने में सफलता भी पाई। मोदी को गुजरात मे विकास के नाम से जाना जाता है। जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो भाजपा की राजनीति अभी की तुलना में अधिक लोकतांत्रिक थी। लोग मोदी के चेहरे को न्याय का चेहरा समझने लगे और गुजरात से मोदी लहर हर घर मे पहुँच गई। अच्छे दिन आने वाले हैं हर मोदी जी को लाने वाले हैं स्लोगन ने राजनीति के एक अलग ही क्रांति ला दी और मोदी को वर्ष 2014 में गुजरात से दिल्ली पहुंचा दिया और जब मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो कोई इन्हें मोदी रूप में नहीं देख रहा यह हर ओर विकास की दृष्टि से देखे जाते थे।
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आखिर क्यों गुजरात मे नही चलता किसी और का दबदबा:-
असल मे गुजरात के मोदी का मैजिक हर बार चलता है लेकिन विशेषज्ञ का मानना है कि मोदी स्वयं नहीं चाहते हैं कि गुजरात मे कोई उनकी तरह अपने पैर पसार पाए। वही विशेषज्ञ रुपाणी के इस्तीफे को इस बात का जीता जाता सबूत बताते हैं और कहते हैं कि वह नहीं चाहते की गुजरात मे कोई भी मुख्यमंत्री अंत तक काम करे और अपनी धाक बनाए। क्योंकि उन्हें पता है कि अगर कोई अंत तक रुकता है तो वह पार्टी की जीत के लिए समस्या बनेगा और गुजरात मे भाजपा सत्ता से दूर नहीं होना चाहती। जिसके चलते अब भाजपा को यहां की राजनीति मे मोदी का विकल्प नहीं मिल पा रहा है और इन्होंने अपनी जीत कायम रखने के लिए मुख्यमंत्री बदलने की नीति अपनाई है।

