गुजरात, जहाँ पिछले 27 बरस से भाजपा का एक छत्र राज चल रहा है, आप इसे मोदी राज भी कह सकते हैं। इतने सालों में कुछ ऊंच नीच के साथ देश की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी बीजेपी को सत्ता बरक़रार रखने में कभी किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा, अब तो गुजरात की अस्मिता बन चुके मोदी जी प्रधानमंत्री पद को सुशोभित कर रहे हैं तो गुजरात चुनाव अपने आप में खुद ही ख़ास बन जाते हैं।
वहीँ यूपी की तरह कांग्रेस पार्टी का यहाँ भी वनवास काल लगातार बढ़ता जा रहा है, देश की सबसे पुरानी पार्टी अब इसे ख़त्म करने के लिए बुरी तरह बेचैन है, इधर AAP भी कारोबारियों के राज्य में जमने के लिए ज़मीन की तलाश कर रही है। यही वजह की आने वाले कुछ दिनों में गुजरात में इन पार्टियों के टॉप लीडर्स के दौरों का दौर शुरू होने वाला है।
इन चुनावी दौरों का दौर जहाँ 10 मई को कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गाँधी की “आदिवासी सत्याग्रह रैली” से शुरू होगा जो दादोह में होगी, वहीँ 11 मई को AAP संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल 11 मई को एकबार फिर गुजरात पधार रहे हैं, इसबार वह राजकोट जायेंगे जहाँ उनका रोड शो और चुनावी रैली का कार्यक्रम है, केजरीवाल का पिछले कुछ हफ़्तों में यह तीसरा दौरा होगा, इससे पता चलता है कि गुजरात चुनाव को लेकर AAP कितना गंभीर है। चूँकि भाजपा की तरह AAP के पास भी एक ही स्टार कैम्पेनर है इसलिए केजरीवाल की दिल्ली से गुजरात की दौड़ ज़्यादा हो रही है।
वहीँ अगर भाजपा की बात करें तो मोदी जी अभी तीन दिन गुजरात में गुज़ार कर गए हैं, अब खबर है कि राहुल और केजरीवाल के कार्यक्रमों की काट करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी का जल्द ही गुजरात का एक दौरा कराने के प्रयास किये जा रहे हैं।
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राज्य भाजपा और कुछ दूसरे संगठनों ने इस बारे में प्रधानमंत्री के पास रिक्वेस्ट भेजी है जिसपर अभी फैसला नहीं हुआ है, शायद राहुल और केजरीवाल के कार्यक्रमों पर लोगों के मिले रिस्पांस पर मोदी जी के इस दौरे का फैसला होगा। अगर इन दोनों नेताओं के कार्यक्रम भाजपा की उम्मीदों को तोड़ते हुए सफल हुए तो फिर प्रधानमंत्री का यह दौरा निश्चित है जो 13- 14 मई तारीखों में हो सकता है।

