Gujarat chunavi dangal: गुजरात जहाँ इस साल के अंत मे विधानसभा चुनाव होने को हैं। वही अगर हम सत्ताधारी दल भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की बात करे तो यह इस समय गुजरात मे आमने सामने है। भाजपा ने अभी हाल ही में पाटीदार समाज पर कांग्रेस की मजबूत पकड़ को कमजोर किया है और उनके लोकप्रिय नेता हार्दिक पटेल को अपने दल का हिस्सा बनाया है।
हालाकि हार्दिक पटेल द्वारा भाजपा ज्वाइन करने के बाद उन्हें पटेल समाज की काफी आलोचनाओ का सामना करना पड़ा और कांग्रेस ने यह दावा किया की उनके जाने से कांग्रेस का वोट बैंक कमजोर नहीं हुआ है। लेकिन अब इस समय अगर पाटीदार समाज के बाद गुजरात मे कोई चर्चा का केंद्र बना हुआ है तो वह है मुस्लिम समाज। वैसे तो गुजरात का मुसलमान कांग्रेस के समर्थन में रहा है और राहुल गांधी पर पिछले चुनाव में उसने विश्वास भी जताया था लेकिन इस बार हालात कुछ अलग है।
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पैगम्बर मोहम्मद को लेकर भाजपा सांसद नुपुर शर्मा द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी ने मुसलमानों को भाजपा से कोषों दूर कर दिया है। आज भले भाजपा इस बात को न स्वीकारती हो लेकिन वास्तविकता यही है कि आज के समय में मुस्लिम समाज भाजपा को बिल्कुल नहीं पसन्द कर रहा है। वही कई बड़े नेताओं ने भाजपा को मुस्लिम विरोधी बताकर जनता के मन मे एक अलग छवि बना दी है। गुजरात के मुस्लिम समाज पर भाजपा की बुलडोजर नीति से लेकर एक एक कदम का बुरा प्रभाव पड़ा है और जनता और भाजपा के मध्य एक खाई बन गयी है।
वही इस खाई का फायदा गुजरात मे कांग्रेस को भी नहीं मिल रहा है। गुजरात का मुसलमान जो की हमेशा कांग्रेस के पक्ष में रहा वह आज कही न कही कांग्रेस से रुष्ट है लोगो का कहना है कि जब भाजपा प्रवक्ता उनके नबी की इज्ज़त उतार रही थी तब यह सभी दल मौन थे और अब भी इस मामले में यह मौन है। इनकीं नीतियों से अब मुस्लिम समाज अवगत है यह सिर्फ अपने वोट बैंक को मजबूत करने के उद्देश्य से हमारे पास आते हैं और इन्हें हमारी व्यक्तिगत और धार्मिक भावनाओं से कोई मतलब नहीं है।
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वही गुजरात मे जो मुस्लिम समाज है वह ओवैसी की ओर थोड़ा झुकाव दिखा रहा है। मुस्लिम समाज का कहना है कि एआईएमआईएम प्रमुख कुछ भी करते हो लेकिन वह मुस्लिम के हित मे बोलने से नहीं कतराते और न वह पैगंबर मोहम्मद पर हुई टिप्पणी पर मौन धारण किए हैं। जनता के ऐसे मतों से यह तो स्पष्ट है कि नुपुर शर्मा के बयान ने गुजरात के चुनाव को खूब प्रभावित किया है और कही न कही अब मुस्लिम वोट बैंक का झुकाव ओवैसी की ओर हो रहा है।

