आरक्षण लिस्ट फाइनल होने के भी 45 दिन बाद होंगे बाद पंचायत चुनाव
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मई तक होने की संभावना
न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर गांवों में राजनीति का दौर शुरू हो चुका है। चौपाल पर बैठ रणनीति तैयार की जा रही है वहीं चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता राजनीतिक गलियारों में सीट पाने को चक्कर काट रहे हैं। लेकिन सरकार की ओर से आरक्षण लिस्ट फाइनल न किये जाने के कारण चुनाव की तिथि तय नहीं हो पा रही है।
ऐसे में जहां चुनाव लड़ने की तैयारियों में जुटे प्रत्याशियों में असमंजस है कि वह अपना चुनावी अभियान कब से शुरू करें। वहीं चुनाव में देरी हो जाने से उनका खर्चा बढ़ने के साथ अन्य लोगों के दावेदारी किये जाने की आशंका भी उनको सता रही है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में दिये गये शेड्यूल में कहा कि राज्य सरकार द्वारा आरक्षण लिस्ट जारी न किया जाना ही चुनाव की तारीखों के ऐलान की प्रमुख वजह है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार 22 जनवरी को पंचायत चुनाव की मतदाता सूची तैयार करने के बाद 28 जनवरी को परिसीमन का कार्य भी संपन्न कर लिया गया है।
मगर सीटों का आरक्षण सरकार द्वारा फाइनल न किये जाने के कारण चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करना संभव नहीं हो पा रहा है। आयोग ने हाइकोर्ट में बताया है कि राज्य सरकार द्वारा सीटों का आरक्षण फाइनल किये जाने के बाद भी चुनाव कराने की व्यवस्थाएं करने में 45 दिन का समय लगेगा।
उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ने 20 फरवरी तक प्रदेश सरकार द्वारा आरक्षण संबंधी शासनादेश जारी किये जाने की बात कही है। यदि सरकार ऐसा कर पायी तो अप्रैल में चुनाव कराये जा सकते हैं।
मगर जानकारों की मानें तो उत्तर प्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों में सरकार शायद ही जल्द चुनाव कराने का खतरा मोल ले। ऐसे में पंचायती चुनाव के मई माह में होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं सरकार की ओर से की जा रही देरी से पंचायती चुनाव के मैदान में उतरने के इच्छुक लोगों सहित सभी राजनीतिक दलों में बेचैनी का माहौल है।

