सुप्रीम से उद्धव ठाकरे खेमे को एक के बाद एक निराशा ही हाथ लग रही है, यह पिछले कुछ दिनों में तीसरी बार है कि उद्धव ठाकरे खेमे को शीर्ष अदालत ने निराश करते हुए राहत देने से इंकार किया है, महाराष्ट्र में सत्ता पलट के बाद उद्धव खेमा सुप्रीम कोर्ट में अपने अपील लेकर पहुंचा था कि शिंदे गुट के बागी विधायकों को विधानसभा में प्रवेश से रोका जाय, लेकिन अदालत ने उनकी अपील पर फौरी तौर पर सुनवाई से साफ़ इंकार कर दिया। यह याचिका शिवसेना के चीफ व्हिप सुनील प्रभु की तरफ से दायर की गयी ही.
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याचिका में सवाल उठाया गया था कि कि अगर शिव सेना और बाग़ी गुट दोनों तरफ से व्हिप जारी होती है तो किसका व्हिप मान्य होगा, मामला चूँकि अभी अदालत में है इसलिए एकनाथ शिंदे और उनके साथी विधायकों को विधानसभा में प्रवेश से रोका जाय. जिस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र में क्या हो रहा है, उसपर उसकी नज़र है लेकिन फिलहाल सुनवाई 11 जुलाई से पहले नहीं होगी, हालाँकि अदालत ने साथ में यह भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े बंद हैं. सुरेश प्रभु की तरफ से पेश हुए वकील कपिल सिब्बल ने शिंदे और बागी विधायकों को भाजपा का मोहरा बताते हुए याचिका में कहा कि इन लोगों ने दलबदल का संवैधानिक पाप किया है और उन्हें सदन में एक दिन के लिए भी शामिल नहीं होने देना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले सोमवार को बागी विधायकों को उस समय अंतरिम राहत दी थी जब महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष द्वारा बागियों को दी गयी अयोग्यता नोटिस पर स्टे दे दिया था और सभी पक्षों को अपना जवाब भेजने के लिए 12 जुलाई तक का समय दिया। इसके बाद राज्यपाल द्वारा फ्लोर टेस्ट के निर्देश पर अदालत ने रोक लगाने से इंकार कर उद्धव सरकार को झटका दिया था जिसके बाद उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था और अब आज एकबार फिर शीर्ष अदालत उद्धव गुट की अपील पर फौरी सुनवाई से इंकार करके न सिर्फ उसे झटका दिया है बल्कि बागी शिंदे गुट को एक बड़ी राहत दी है. बता दें कि राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी ने ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सोमवार को अपना बहुमत साबित करने को कहा है.

