Indian Students: यूक्रेन से पढ़ाई छोड़कर भारत लौटे छात्रों के भविष्य का फैसला करेगा सुप्रीमकोर्ट

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नई दिल्ली। रूस यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन से लौटे मेडिकल के छात्र-छात्राओं के भविष्य का फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगी। देश में दाखिला लेने की मांग कर रहे यूक्रेन से लौटे मेडिकल के छात्रों को नेशनल मेडिकल काउंसिल ‘एनएमसी’ और भारत सरकार के अधिकारियों से निराशा लगी है। छात्रों ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की इस याचिका को स्वीकार कर लिया है। छात्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने के साथ पांच सितंबर को एनएमसी और भारत सरकार के अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का निर्देश जारी किया है। यूक्रेन में स्थित मेडिकल व इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी से देशभर के हजारों छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे थे। इनमें उत्तर प्रदेश से करीब 1175 से अधिक छात्र-छात्राएं यूक्रेन में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। फरवरी में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया और अचानक युद्ध शुरू हुआ तो सैकड़ों छात्र-छात्राएं यूक्रेन में फंस गए। तब भारत सरकार की ओर से चलाए रेस्क्यू अभ्यिान में सभी को सुरक्षित वापस लाया गया था। यूक्रेन में अब रूस लगातार हमला कर रहा है। ऐसे में छात्र-छात्राएं भारत सरकार और एनएमसी से देश में दाखिला दिलाने की मांग कर रहे थे।

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यूक्रेन से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र तुषार निगम, छात्र दिव्यम तिवारी, विशाल श्रीवास्तव, अर्पित, आकांक्षा ने बताया कि जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो उन लोगों ने देश के अन्य छात्रों के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। जिसे सुप्रीमकोर्ट में न्यायाधीश हेमंत गुप्ता व विक्रम नाथ की अदालत ने स्वीकार कर लिया। छात्रों ने बताया कि अदालत ने पांच सितंबर को सुनवाई की तारीख दी है। छात्रों ने अपने भविष्य को लेकर अपना पक्ष रखा। इस केस में देशभर के करीब 55 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। हालांकि इस फैसले का लाभ उन लोगों को भी मिलेगा जो कि विदेश में पढ़ाई कर भारत आते हैं और फिर यहां पर एडमिशन की कोशिश करते हैं। लेकिन लाख कोशिश के बाद भी उनको एडमिशन नहीं मिल पाता है।

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