प्रशांत किशोर के कांग्रेस पार्टी से गठबंधन टूटने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल कि क्या हार्दिक की नाराज़गी के बीच नरेश पटेल का भी कांग्रेस पार्टी से रिश्ता जुड़ेगा? अगर उनके कल के बयान को देखा तो जाय तो हाँ भी है और न भी लेकिन जो बात सबसे बड़ी है वह है अगर नरेश पटेल गुजरात के युद्ध में कांग्रेस के अर्जुन बनते हैं तो प्रशांत किशोर ही उनके कृष्ण बनेंगे और उनका चुनावी रथ संभालेंगे।
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दरअसल नरेश ने कहा कि प्रशांत किशोर मेरे दोस्त है और अगर मैं सक्रिय राजनीति में उतरा तो वह मेरे साथ होंगे, मतलब नरेश पटेल ने पार्टियों के सामने एक तरह से शर्त रख दी कि अगर मुझे चाहते हो तो प्रशांत किशोर को भी चाहना होगा। नरेश पटेल का यह बयान गुजरात के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. कयास लगाए जा रहे हैं कि नरेश पटेल और पीके की जोड़ी किधर शिफ्ट करेगी, क्या पीके से डील टूटने के बाद भी कांग्रेस से इस जोड़ी का गुजरात में पैक्ट होगा या फिर गुजरात में कांग्रेस का विकल्प बनने की कोशिश कर रही आम आदमी पार्टी के साथ यह जोड़ी जाएगी।
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नरेश पटेल की पीके वाली शर्त के साथ इतना तो तय है कि भाजपा में इन दोनों का कोई भविष्य नहीं और न ही भाजपा को एक मुख्य लीडर के तौर पर नरेश पटेल की ज़रुरत है, हाँ सहयोगी ज़रूर बन सकते हैं. बहरहाल नरेश पटेल ने इतना ज़रूर कहा है कि वह मामले को लम्बा नहीं खीचेंगे और मई के मध्य तक यह बात साफ़ कर देंगे कि उन्हें राजनीति में आना है या नहीं। इसका मतलब यह हुआ कि कांग्रेस पार्टी भी गुजरात में नरेश पटेल और हार्दिक के मामले को अभी टालती रहेगी।
इस टालमटोल का अंत मई में हो जायेगा, पक्के तौर पर कहा नहीं जा सकता। हार्दिक पटेल ने कांग्रेस पार्टी पर जो आरोप लगाया था उसमें बहुत दम है कि वह नरेश पटेल पर फैसला नहीं ले पा रही है लेकिन यह कांग्रेस के हाथ में नहीं क्योंकि फैसला तो नरेश पटेल को लेना है और कांग्रेस को इंतज़ार करना है.

