Gujarat chunavi dangal:- साल के अंत मे गुजरात मे होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी तेजी से चल रही। सत्ताधारी भाजपा ने जहां गुजरात मे अपनी पुनः वापसी के लिए जाल बुनना आरम्भ कर दिया है। वही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भाजपा को मात देने के लिए अपनी ओर एक ब्रह्रास्त्र की खोज में है। कांग्रेस इस समय गुजरात भेदने और यहां खुद को साबित करने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही है।
लेकिन इसी बीच कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल के बगावती तेवर कांग्रेस के लिए नासूर बनते जा रहे हैं। जहां कांग्रेस यहां पर अपने 27 साल के वनवास को खत्म करना चाहती है वही पार्टी की अंदरूनी कलह जनता के बीच कांग्रेस की टूटी फूटी स्थिति का संदेश दे रही है। अब अगर ऐसे में कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल ने आपसी मतभेद को न सुलझाकर किसी अन्य पार्टी का दामन थाम लिया तो यह कांग्रेस के लिए घाटे का सौदा हो सकता है और इसका फायदा अन्य कांग्रेस विरोधी दल को प्राप्त होगा।
क्या है गुजरात मे कांग्रेस का हाल:-
अगर हम वर्तमान समय मे गुजरात में कांग्रेस की स्थिति को समझे तो आपसी मतभेद के लिए विख्यात कांग्रेस में यह स्थिति यहां भी बरकरार है। बड़े नेताओं से लेकर छोटे नेताओ के बीच आपसी मतभेद बना हुआ है। इस मतभेद के चलते पार्टी में एकता की कमी है और पार्टी आपस मे छोटे छोटे गुटों में विभाजित है। अगर हम कांग्रेस के गुटों की बात करें तो पार्टी चौतरफा गुट के जाल में फसी है पार्टी को एक ओर से शक्ति सिंह गुट, तो दूसरी ओर से भरत सोलंकी गुट , तीसरी ओर से जगदीश ठाकोर गुट तो चौथी ओर हार्दिक गुट अपनी ओर खींच रहा है।
पार्टी में इन गुटों के बीच हार्दिक के भाजपा में शामिल होने की खबरें भी तूल पकड़े हुए हैं। वही आपसी गुट बाजी की राजनीति लगातार कांग्रेस को कमजोर करती जा रही हैं। बता दें अभी हाल ही में हुए पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस की बेहद शर्मनाक हार का मुख्य कारण इनकी अंदरूनी कलह और पार्टी में एकता की कमी थी। अब गुजरात कांग्रेस की उसी राह पर है जो कांग्रेस की गुजरात विजय की राह मुश्किल बना रही है।
राहुल की चुप्पी से क्या टूटेगा गुजरात विजय का सपना:-
एक ओर कांग्रेस गुजरात विजय के सपने सजाए हुए हैं वही दूसरी ओर पार्टी के प्रमुख लीडर राहुल गांधी ने मौन धारणा कर रखा है। वह हार्दिक पटेल के बगावती तेवर से लेकर गुजरात की पार्टी में हो रही गुट बाजी पर मौन है। उनके इस मौन के पीछे का कारण तो स्पष्ट नहीं हुआ है लेकिन उनकी यह चुप्पी भाजपा को आगे बढ़ने में मदद रही है। अगर हम वर्ष 2017 से तुलना करें तो तब राहुल बैक टू बैक गुजरात दौर कर रहे थे भाजपा की हर रणनीति को तोड़ने के लिए अपना ब्रह्रास्त्र छोड़ रहे थे लेकिन इस बार वह महज 1 बार गुजरात दौरे पर गए हैं जो गुजरात मे कांग्रेस के समीकरण को बिगाड़ सकता है।
बड़े चेहरे की कमी बन रही कांग्रेस की कमजोरी:-
अगर हम भाजपा और कांग्रेस के नेताओं की तुलना करें तो भाजपा के पास तुरुप का इक्का साबित हुए नरेंद्र मोदी, चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह जैसे बड़े चेहरे है। गुजरात मोदी का गढ़ है यहां मोदी मैजिक का बेनिफिट भाजपा को प्राप्त हो सकता है। लेकिन कांग्रेस की गुजरात मे बागडोर जगदीश ठाकोर पार्टी अध्यक्ष हैं और विपक्ष नेता सुखराम राठवा के हाँथ में है दोनो नेताओ का राजनीतिक करियर बहुत बेहतरीन नहीं रहा है। वही राहुल गांधी कांग्रेस से एक मात्र मुख्य लीडर है जो इस समय चुप्पी साधे हुए हैं। अब ऐसे में कांग्रेस अगर किसी बड़े नेता पर गुजरात मे दाव नहीं खेलती है तो उसे भाजपा के सामने चुनावी विजयरथ हाँकने में समस्याओं को झेलना पड़ सकता है।

