संघर्षों से जूझ रही कांग्रेस ने उदयपुर में हुए चिंतन शिविर के जरिए पार्टी को नए बदलाव के साथ उभारने की कोशिश की और नेताओं को यह विश्वास दिलाया की उनकी पार्टी जनता के बीच नई नीतियों और नए जोश के साथ उतरेगी और पुनः अपना वर्चस्व स्थापित करेगी।
लेकिन कांग्रेस के चिंतन शिविर का जादू पार्टी के नेताओ पर कुछ खास असर नहीं डाल पाया और चिंतन शिविर खत्म होने के बाद गुजरात कांग्रेस में बड़ी फुट देंखने को मिली। पाटीदार समाज के प्रमुख चेहरा कहे जाने वाले हार्दिक पटेल ने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया। हार्दिक के कांग्रेस से जाने के बाद गुजरात मे कही न कही कांग्रेस की एक हड्डी चटक गई है और इसमें बड़ी फुट दिखाई दे रही है।
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कांग्रेस ने किया प्रयास लेकिन नहीं रुके हार्दिक:-
हार्दिक के कांग्रेस से जाने की अटकलें दो माह पहले से राजनीति गलियारों में हिचकोले खा रही थी। कांग्रेस ने कई बार हार्दिक से बात करने की कोशिश की। पार्टी नेता राहुल गांधी ने हार्दिक से बातचीत करने का प्रस्ताव रखा था लेकिन उनकी बातचीत होती उससे पहले ही हार्दिक पटेल ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया। अब अगर हम कांग्रेस से हार्दिक के जाने की बात को चुनावी परिपेक्ष्य से देखें तो इनका जाना भाजपा के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।
हार्दिक पाटीदार समाज का वोट बैंक कहे जाते थे। हार्दिक के होने से इस समाज पर कांग्रेस की ठीक ठाक धाक बनी हुई थी लेकिन अब जब कांग्रेस ने अपनी नीतियों के चलते हार्दिक को रुष्ट किया है और हार्दिक ने अपने पद से इस्तीफा देकर खुद को कांग्रेस से अलग किया है तो इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ेगा।
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अगर भाजपा में गए हार्दिक तो क्या होगा कांग्रेस का हाल:-
गुजरात के पिछले 25 साल से भाजपा ने सत्ता पर अपनी धाक जमा रखी है भाजपा का गुजरात में एक मजबूत वोट बैंक भी है। वही अब यह अटकलें तेज है कि हार्दिक पटेल इस सप्ताह के भीतर भाजपा परिवार का हिस्सा बन जाएगे। वही गुजरात के राजनीतिक विशेषज्ञ का कहना है कि अगर हार्दिक पटेल ने भाजपा का हाँथ थाम लिया तो यह कांग्रेस की लिए बड़ी त्रुटि होगी और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का वोटिंग रेश्यो नीचे खिसक सकता है क्योंकि पांच राज्यों में मिली करारी हार के बाद जनता के बीच कांग्रेस की छवि धूमिल हुई है अब अगर ऐसे में इनकीं पार्टी के इस मजबूत नेता ने भाजपा से हाँथ मिलाकर पार्टी का विरोध किया तो यह जनता को प्रभावित करेगा और गुजरात मे कांग्रेस को अपने 27 साल के वनवास को खत्म करने के लिए कठिन संघर्ष से जूझना पड़ेगा।

