गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर सत्ताधारी भाजपा में काफी हलचल है, हलचल इस बात को लेकर हैं कि क्या भाजपा अपने बुज़ुर्ग नेताओं को टिकट देगी? पार्टी के अंदर इस मुद्दे को लेकर सियासी पारा गरमाया हुआ है, ख़बरों के मुताबिक भाजपा चाहती है कि इस चुनाव में पार्टी के बुज़ुर्ग नेताओं को थोड़ी दूरी बनाये रखी जाय मगर उसे इस बात का भी डर है कि ऐसे में जब आम आदमी पार्टी प्रदेश में काफी तेज़ी से उभर रही रही, वरिष्ठों के टिकट काटना कहीं गले की फांस न बन जाय. इस बीच शनिवार को गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी का एक बयान भी सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर पार्टी टिकट देगी तो वो जरूर चुनाव लड़ेंगे. उनके इस बयान से लोग अंदाज़ा लगा रहे हैं कि उन्हें भी शायद इस बात की जानकारी मिल चुकी है कि टिकट वितरण में पार्टी क्या करने जा रही है.
दरअसल गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी अपने परिवार के साथ दर्शन के लिए शक्तिपीठ अंबाजी पहुंचे थे. दर्शन के बाद पत्रकारों ने उनसे जब चुनाव लड़ने के बारे में सवाल किया तो जवाब था कि अगर पार्टी टिकट देगी तो वो जरूर चुनाव लड़ेंगे और अगर टिकट नहीं मिलता है तो बतौर कार्यकर्ता पार्टी को जिताने के लिए काम करेंगे. अब रुपानी के इस बयान का लोग अपनी तरह से अलग अलग निकाल रहे हैं.
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विजय रुपाणी की बात करें तो मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद पार्टी ने उनसे दूरी बना रखी है, भाजपा आलाकमान ने पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी और उनकी कैबिनेट को जिस तरह महज 24 घंटे के अदंर ही बदलने का फैसला लिया गया था, रुपाणी को साइडलाइन किये जाने के संकेत तभी मिल गए थे. जिस समय विजय रुपानी को हटाया गया था तब कहा जा रहा था कि उन्हें सगंठन में जल्द ही बड़ा स्थान दिया जाएगा लेकिन एक साल बीतने के बाद भी वह गुमनामी में हैं और शायद निराशा में ही वह टिकट मिलने न मिलने की बात कह रहे हैं.

