- बार्बी ही नहीं, बल्कि उसका बॉयफ्रेंड केन और उसके छोटे भाई बहन टुटी और टोड भी बच्चों के दुलारे बन गए
- प्लास्टिक की इस गुड़िया के लिए खास कपड़े भी बनने लगे, दुनियाभर के बच्चों के प्लेरूम का हिस्सा बनी
अमित बिश्नोई
यदि आप से पूछा जाए कि क्या आप बार्बी डॉल को जानते है तो आप तुरंत आंसर देंगे हां. मौजूदा दौर में शायद ही कोई हो जो बॉर्बी डॉल को न जानता हो.लेकिन क्या आपको पता है कि आपकी बार्बी डॉल 60 साल की हो चुकी है.दरअसल, पीएम मोदी ने हाल ही में मन की बात खिलौने यानी टॉयज की मैन्यूफैक्चरिंग इंडिया में ही हो इस पर बल दिया है. उनका कहना है कि इससे लोगों को राेजगार मिलेगा और देश तरक्की करेगा साथ ही किसी के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. देश भर में खिलौनों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. आज हम आपको बार्बी डॉल के बारे में बताने जा रहे है जिसने दशकों बच्चों के दिलों में राज किया और आज भी राज कर रही है.
9 मार्च 1959 से अब तक का सफर
सुनहरे बाल, पतली कमर, उभरा हुआ सीना और लंबी टांगें. यही तो बार्बी की पहचान हैं. 9 मार्च 1959 को खिलौने बनाने वाली कंपनी मेटल ने पहली बार्बी डॉल पेश की. जल्द ही वह दुनिया भर में बच्चों के प्लेरूम का अहम हिस्सा बन गई.कुछ लड़कियों को खिलौने के रूप में घोड़े पसंद होते हैं तो कुछ को बार्बी के साथ खेलना. उनका कमरा बार्बी की दुनिया बन गया. बार्बी ही नहीं, बल्कि उसका बॉयफ्रेंड केन और उसके छोटे भाई बहन टुटी और टोड भी बच्चों के दुलारे बन गए. प्लास्टिक की इस गुड़िया के लिए खास कपड़े भी बनने लगे.

बार्बी का जवाब नहीं
1980 के दशक में बार्बी और केन बहुत सी लड़कियों के लिए परफेक्ट खिलौने थे और एक शानदार लव स्टोरी के किरदार भी. जर्मनी में उसके मुकाबले पेट्रा डॉल लाई गई जो थोड़ी सस्ती थी, लेकिन असली बार्बी से उसका कोई मुकाबला नहीं था. उसकी मुड़ने वाली टांगे और बाजु, उसके कपड़े, बिकनी, चश्मे, हाई हील सैंडल और हैंडबैग, सब कुछ कमाल था.

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के रूप में आई कामकाजी बार्बी
1990 के दशक में बार्बी डॉल का मेकओवर भी हुआ. उसे बनाने वाली मेटल कंपनी ने एस्ट्रोनॉट, कंप्यूटर इंजीनियर, डॉक्टर, टीचर और आर्किटेक्ट की थीम पर बार्बी गुड़ियां बनाईं. यहां तक कि बार्बी को राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के रूप में भी पेश किया गया.
समय-समय पर बदलता रहा अंदाज
2000 आते आते बार्बी का अंदाज और बदला. बार्बी अब सिर्फ कैटवॉक करने वाली मॉडल नहीं बल्कि एक मध्यवर्गीय महिला भी बनी. उसके कपड़े भी ग्लैमरस नहीं रहे. उसने आम लोगों वाले कपड़े पहने. 2016 में मेटल ने शरीर के हिसाब से चार आकार में बार्बी डॉल बनानी शुरू कर दी.
हिजाब पहने भी दिखी बार्बी
क्या कोई 60 साल पहले इस बात को सोच सकता था कि कभी बार्बी हिजाब भी पहनेगी? लेकिन ऐसा हुआ. अमेरिकी खिलाड़ी इब्तिहाज मोहम्मद से प्रेरणा लेकर हिजाब वाली बार्बी बनाई गई. इब्तिहाज पहली ऐसे अमेरिकी महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने हिजाब पहनकर 2016 के रियो ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया था.

दुनिया की सैर
कीनिया की बार्बी राजधानी नैरोबी की कोई फैशनेबल मॉडल नहीं, बल्कि पारंपरिक कपड़े पहनने वाली लड़की थी, जो हर तरह से आपको स्थानीय रंग में रंगी दिखती है. यह बार्बी डॉल की वर्ल्ड कलेक्टर सिरीज का हिस्सा है.
महिलावादी बार्बी का मामला कोर्ट तक पहुंचा
मेक्सिको की कलाकार फरीदा काहलो वाली बार्बी बनाना एक अच्छा ख्याल था. लेकिन ऐसी गुड़िया बनाने के लिए मेटल को कॉपीराइट के उल्लंघन के आरोप में अदालत में खींचा गया. आखिरकार इस गुड़िया को हटाना पड़ा. यह गुड़िया ऐतिहासिक किरदारों पर बनी बार्बी सिरीज का हिस्सा थी. इसमें अमेरिकी एविएटर एमेली एरहार्ट (बाएं) और भौतिकशास्त्री कैथरीन जॉनसन (दाएं) को जगह दी गई.
2019 और आगे का सफर
बार्बी डॉल कलेक्शन का काम बहुत लंबे समय से चल रहा है. बार्बी को लेकर सबसे नई बात है व्हीलचेयर वाली बार्बी और कृत्रिम टांग वाली बार्बी. बार्बी बनाने वाली कंपनी को समझ आ गया है कि वह सिर्फ सुनहरे बाल, नीली आंख और पतली कमर वाली गुड़िया के जरिए आज के जमाने के बच्चों का दिल नहीं जीत पाएंगे.

