फिल्म शेरनी की शूटिंग कान्हा नैशनल पार्क में हुई है। इसके अलावा शूटिंग मध्यप्रदेश के जंगलों, कान्हा नेशनल पार्क, रायसेन के भूत पलासी और बालाघाट के आसपास के इलाकों में की गई है। इसीलिए आज हम आपको कान्हा नेशनल पार्क के बारे में कुछ खास बातएंगे ताकि कभी आप घूमने का प्लान बनाए तो यहां की सैर जरूर करे |
कान्हा नेशनल पार्क मध्यप्रदेश के मंडला और बालाघाट जिले है, इसे कान्हा टाइगर रिजर्व के रूप में भी जाना जाता है। यहां बंगाल टाइगर की काफी आबादी रहती है तो जंगल सफारी के दौरान बाघ दिखने की संभावना ज्यादा होती है | यहां चीता, चीतल, गौड़, बार्किंग डियर और कई तरह के पक्षियों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं।
नेशनल पार्क पर्यटकों के लिए अक्टूबर महीने से लेकर जून महीने तक खुला रहता है, लकिन नवंबर से फरवरी के बीच में काफी लोगो घूमने आते है | कान्हा नेशनल पार्क का बामीन दादर सबसे ऊंचा पठार है, जो यहां के सनसेट पॉइंट के रूप में जाना जाता है।
नेशनल पार्क अपनी प्रकृतिक जीवंतता के लिए प्रसिद्ध है। यहां पेड़ों की 70 से ज्यादा और फूलों के पौधों की 200 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, और साथ में पक्षियों की लगभग 300 प्रजातियां भी पाई जाती है जैसे की सारस, चैती, पिंटेल, तालाब बगुले, मोर, हूप, बटेर, रॉक कबूतर, कोयल, रोलर्स, ओरीओल्स, उल्लू, ग्रीन कबूतर, कठफोड़वा, फिंच, किंगफिशर, जंगल फाउल, पैराकीट पक्षी आदि |
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कान्हा नेशनल पार्क में जंगल सफारी के लिए एक हाजर से दो हजार रुपये में जीप बुक करनी पड़ती है | दो स्लॉट में स्लॉट बुक होते हैं, पहला स्लॉट सुबह 6 बजे से 11 बजे तक, तो वहीं दूसरी दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे का होता है। सुबह बाघ दिखने की संभावना ज्यादा होती है | इसके अलावा यहां हाथी की सफारी भी करवाई जाती है जिसका 300-600 रुपये प्रति व्यक्ति देने होते हैं।

