आजकल थाइरॉइड से जुड़ी समस्याएं आम है, ये खासतौर पर महिलाओं को ज़्यादा प्रभावित करती है।थायरॉइड दो तरह का होता है – हाइपरथायरॉइडिज़्म और हाइपोथायरॉइड , और आज हम आपको हाइपो-थायरॉयडिज़्म के बारे में बातएंगे |
हाइपो-थायरॉयडिज़्म में थायराइड ग्रंथि पर्याप्त थायराइड हार्मोन नहीं बनाती है, जिसकी वजह से लोगों को अक्सर ठंड लगती है और थका हुआ महसूस कर सकते हैं। इसके अलावा वज़न भी आसानी से बढ़ जाता है। अगर आप हाइपो-थायरॉयडिज़्म को कंट्रोल में रखना चाहती है तो फिज़िकल एक्टिविटी और अच्छी डाइट को अपनाए |
हाइपो-थायरॉयडिज़्म है तो प्रोसेस्ड फूड्स को बिलकुल निकाल दें। इसका सेवन करने से हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम ज़्यादा होता है और ये ख़तरे को और ज़्यादा बढ़ा देता है।
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चीनी में कैलोरी होती है और आप अगर मीठे के शौक़ीन हैं, तो चॉकलेट, चीज़केक या ज़्यादा चीनी के सेवन से बचें। ऐसा इसीलिए हाइपो-थायरॉयडिज़्म की वजह से मेटाबॉलिज़्म धीमा होता है, और फिर मीठा खायेंगे तो वज़न बढ़ता है।
हाइपो-थायरॉयडिज़्म में मीट, बटर, मेयोनीज़, जैसी चीज़ों से दूरी बना ले और साथ ही तला-भुना खाना भी नहीं खाए | इसके अलावा जितना हो सके कौफीन के सेवन से भी बचे |
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हाइपो-थायरॉयडिज़्म में सोया मिल्क, टोफू, सोया बीन्स जैसे सोया वाले फूड प्रोडक्ट्स नहीं खाने चाहिए, क्योकि इसमें आइसोफ्लेवोन पाया जाता है, जो हाइपोथायरॉयड में नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा ग्लूटेन के सेवन से बचे, ये थायरॉयड बढ़ सकता है।

