International Midwives Day 2022: दाई माँ का आधुनिक व शिक्षित स्वरुप है Midwives

लाइफस्टाइलInternational Midwives Day 2022: दाई माँ का आधुनिक व शिक्षित स्वरुप है Midwives

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शिशु-मार्त मृत्यु दर रोकने के लिए मिड वाइफ का रोल अत्यंत महत्वपूर्ण है। अभी तक निजी क्षेत्र में ही बड़ी संख्या में मिडवाइफ (Midwives ) शामिल थी। किंतु अब सरकारी क्षेत्र में भी मिडवाइफ का दायरा भारत में बढ़ने जा रहा है।  देश में 14 ऐसे सेंटर तैयार होने जा रहे हैं। जहां मिडवाइफ ( Midwives ) को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें देश का सबसे पहला सेंटर लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज मेरठ को मिला है। वर्ष 2018 से राष्ट्रीय स्तर पर देशभर में इन सेंटरों को संचालित करने की योजना का प्रारूप तैयार किया गया था। उसके बाद से ही लगातार इस पर काम किया जा रहा है। 2021 में योजना पहली बार लागू की गई। 14 सेंटरों में कई राज्यों की ऐसी छात्राएं जिन्होंने बीएससी- एमएससी नर्सिंग के क्षेत्र में शिक्षा हासिल की हो और साथ में 3 से 5 साल का मिडवाइफरी (Midwifery )का अनुभव भी हो उनके लिए पहली बार सरकारी क्षेत्र में नए अवसर खुलने जा रहे हैं।

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चिकित्सकों की कमी होगी पूरी

सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के तहत जिला अस्पताल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव कराने वाले चिकित्सकों का भयंकर टोटा है बड़े स्तर पर मिडवाइफ  कोर्स (Midwives Course ) के जरिये सरकार इनकी कमी को पूरा करने की कोशिश कर रही है। देश के महिला अस्पताल ओं के साथ ही ऐसे सामुदायिक केंद्रों पर प्रशिक्षित मिडवाइफ की तैनाती की जाएगी। सामान्य प्रसव कराने से लेकर गर्भवती की देखरेख और नवजात के बेहतर लालन पालन से संबंधित सभी प्रकार दक्षता इन्हें सिखाई जाएंगी।

होगा अहम रोल 

कई बड़े देशों में मिडवाइफ (Midwives) का रोल बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। की तर्ज पर अब भारत में भी इन्हें बड़े स्तर पर चिकित्सा सेवाओं में तैनात किया जाएगा सरकारी अस्पतालों में प्रत्येक गर्भवती को एक मिडवाइफ (Midwives)उपलब्ध हो सकेगी। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक भारत में शिशु मातृ मृत्यु दर दुनिया के कई देशों से काफी खराब स्थिति में है। बांग्लादेश और नेपाल के मुकाबले भी भारत की स्थिति इस मामले में बेहतर नहीं है। इसे रोकने के लिए ही ये प्रयास किये जा रहे हैं।

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क्या होती है मिड वाइफ

पहले दौर में प्रसव करवाने के लिए अलग से महिलाएं बुलाई जाती थी जिन्हें दाई अम्मा दायमा कहा जाता था। अब उच्च शिक्षित और  प्रशिक्षण पाकर मिड वाइफ (Midwives) प्रसव करवाती हैं। इन महिलाओं के प्रति आभार प्रकट करने के लिए दुनिया भर में मई महीने की 5 तारीख को हर साल अंतराष्ट्रीय मिड वाइव्स दिवस (International Midwives Day )आयोजित किया जाता है। गर्भवती महिला और  शिशुओं की देखभाल में इनका आदिकाल से ही अहम रोल रहा है। ये गर्भवती का पहला संपर्क केंद्र भी होती है। इनके होने से सामान्य प्रसव की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाती हैं।

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