- लखीमपुर हिंसा को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में हुई तीसरी सुनवाई
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अब तक की जांच से नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि इस संबंध में दर्ज दो एफआईआर को नजरअंदाज कर एक विशेष आरोपी को लाभ दिया जा रहा है। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र का बेटा आशीष मिश्र मुख्य आरोपी है और इन दिनों जेल में बंद है।
बीती 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में 4 किसानों सहित 8 लोगों की मौत हो गयी थी। सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर हिंसा का स्वतः संज्ञान लिया था। आज इस प्रकरण में तीसरी बार सुनवाई हुई। पहली दो बार की सुनवाई के दौरान मामले की जांच से असंतुष्ट सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी तीसरी बार की सुनवाई में भी बनी रही। यूपी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल किये जाने के बावजूद सीजेआई एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ अब तक की जांच से संतुष्ट नहीं है।
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सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें यह कहते हुए दुख है कि दो एफआईआर को नजरअंदाज कर एक विशेष आरोपी को लाभ दिया जा रहा है। सीजेआई एनवी रमना ने स्टेटस रिपोर्ट को पहले की तरह बताते हुए कहा कि 10 दिन के समय में कोई प्रगति नहीं हुई। लैब रिपोर्ट नहीं आयी, फोन रिकार्ड का परीक्षण भी नहीं किया गया, सिर्फ कुछ गवाहों के बयान दर्ज कराये गये हैं। सीजेआई एनवी रमना ने दोनों एफआईआर की जांच अलग-अलग करने का आदेश दिया है।
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गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी हिंसा में 26 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने जांच से नाराजगी जताते हुए हिंसा के गवााहों को सुरक्षा देने और स्टेटस रिपोर्ट दर्ज दाखिल करने के आदेश दिये थे। वहीं इस मामले में 20 अक्टूबर को हुई सुनवाई में भी यूपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगायी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 44 में से सिर्फ 4 ही गवाहों से पूछताछ किये जाने पर कहा था कि पुलिस मामले की जांच करने से पीछे हट रही है।

