पीएम मोदी के “कांग्रेस मुक्त भारत” के सपने को कांग्रेस के रणनीतिकार साकार करना चाहते हैं?। उदययपुर में हुई चिंतन बैठक के बाद से कई दिग्गज कांग्रेसी पार्टी छोड़ चुके हैं। आज गुजरात में कांग्रेस की उम्मीद हार्दिक पटेल भी भाजपाई हो गए है। इससे पहले अभी राज्यसभा उम्मीदवारों के लिए जिस तरह से कांग्रेस ने नामों की घोषणा की उस पर काफी विवाद हुआ। कांग्रेस ने उम्मीदवारों की सूची जारी कर यह जता दिया कि वो दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, अति पिछड़ों के अलावा अल्पसंख्यकों के वोटों के भरोसे सत्ता में वापसी का सपना तो देख रही है। परंतु हैरानी यह है कि कांग्रेस राज्यसभा के उम्मीदवारों की सूची में दस में पांच स्वर्ण समाज के ही थे। यानि अगड़ों में ब्राह्मण एवं वैश्य चेहरों को उम्मीदवार बनाया है। राजीव शुक्ला, प्रमोद तिवारी, अजय माकन के अलावा पी. चिदंबरम और विवेक तन्खा हैं। ऐसे में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, जो कि राज्यसभा जाने का सपना देख रहे थे। पार्टी नेतृत्व से नाराज हो गए हैं। कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने तो यहां तक ट्वीट किया है कि ‘शायद उनकी तपस्या में कमी रह गई’, इसलिए उनको राज्यसभा नहीं भेजा जा रहा।
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पार्टी के अंदर इस तरह के नाराजगी के सुर उठने से यह आभास होने लगा है कि कांग्रेस के भीतर बड़ी हलचल मच चुकी है। कुछ नेता पार्टी छोड़कर जा चुके हैं, जिनमें कपिल सिब्बल का जाना चौंकाने वाला रहा। माना जा रहा है कि कांग्रेसी जो राज्यसभा उम्मीदवारी का इंतजार कर रहे थे वो भी भाजपा का दामन थाम सकते हैं। ‘जी23’ में बाकी बचे कांग्रेसी भी भाजपा के संपर्क में हैं। मौका मिलते ही ये कांग्रेसी भाजपा के कांग्रेसी कुनबे में शामिल हो सकते हैं। ज़ाहिर सी बात है कि भाजपा के कांग्रेसी कुनबे में पहले से ज्योतिरादित्य सिंधिया, आरपीएन सिंह,अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़, जितिन प्रसाद, एन बीरेन,हेमंत बिस्वा शर्मा और अनेक नेता जो पहले ही भाजपा का रुख कर चुके है। गौर करने वाली बात यह है कि पूरे देश में आंकड़ों के तौर पर ब्राह्मण समाज की आबादी चार प्रतिशत से थोड़ी कम ही है। लेकिन हैरानी की बात है कि आज घोषित तौर पर ब्राह्मण और बनिया वर्ग सत्ताधारी भाजपा के साथ हैं। वहीं अब दिग्गज कांग्रेसी नेता भाजपा का दामन थामककर मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत के सपने को साकार करना चाहते हैं।

