32 साल बाद मिटी देखखाप और बालियान खाप की दूरियां

मेरठ रीजन32 साल बाद मिटी देखखाप और बालियान खाप की दूरियां

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32 साल बाद मिटी देखखाप और बालियान खाप की दूरियां

बड़ौत तहसील परिसर में हुई महापंचायत में शामिल हुई देशखाप
महापंचायत में ऐलान, राकेश टिकैत के आंसू बर्बाद नहीं होने देंगे

बागपत। कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलनरत भाकियू नेता राकेश टिकैत के आंसूओं में देशखाप और बालियान खाप के बीच 32 सालों से बनी हुई दूरियां भी बह गयीं। उत्तर प्रदेश के जिला बागपत के बड़ौत तहसील परिसर में हुई महापंचायत में शामिल हुए देशखाप चैधरियों ने एक स्वर में राकेश टिकैत को समर्थन देने और उनके कंधे से कंधा मिलाकर किसानों के हक में लड़ाई लड़ने का ऐलान किया।

देशखाप और बालियान खाप के बीच बनी दूरियों का सफर 32 सालों का है। सन 1988 में देशखाप ने मेरठ कमिश्नरी पर आंदोलन चला रहे बालियान खाप के मुखिया महेंद्र सिंह टिकैत के समर्थन में बड़ौत में पंचायत की थी। इसके बाद दोनों खापें कभी एक साथ नहीं आयीं। मगर राकेश टिकैत के आंसूओें ने देशखाप और बालियान खाप को एकजुट कर दिया। बड़ौत तहसील परिसर में आयोजित महापंचायत में 32 साल के लंबे अरसे के बाद बालियान और देशखाप के बीच की दूरियां मिट गयीं और उन्होंने एक साथ मिलकर राकेश टिकैत को समर्थन देने की घोषणा की। देशखाप के मुखिया सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि किसानों का धरना किसान के स्वाभिमान और पगड़ी के सम्मान का प्रतीक है। किसान किसी भी हाल में राकेश टिकैत के आंसूओं को बर्बाद नहीं होने देंगे। केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानूनों को वापस न लिये जाने तक धरना जारी रहेगा। है। महापंचायत को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा, देशभर के करोड़ों किसानों के आंसू राकेश टिकैत के आंखों से निकले हैं। किसान हार मानने वालों में से नहीं हैं। इस दौरान बागपत के गांव-गांव से किसानों के धरने में शामिल होने और टिकैत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर किसानों के हक की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया गया।

32 साल बाद सारे गिले-शिकवे मिटाकर एकजुट हुई देशखाप और बालियान खाप के साथ महापंचायत में देशखाप, चैबीसी, थाम्बा, चैगामा और चैहान खाप के चैधरियों के अलावा भाकियू सहित तमाम किसान संगठनों, रालोद, सपा, आम आदमी पार्टी व कांग्रेस के पूर्व विधायकों, पार्टी पदाधिकारियों ने भी भाग लिया। वहीं देशखाप और बालियान खाप के एक साथ आ जाने से राजनीतिक समीकरण भी प्रभावित हुए हैं। देखना होगा कि दोनों खापों का मिलन यूपी की राजनीति पर क्या प्रभाव डालेगा।

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