कहीं मेकअप न बिगड़ जाये…

मेरठ रीजनकहीं मेकअप न बिगड़ जाये…

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मास्क पहनने के मामले में महिलाएं बना रहीं दूरी
कोरोना का खतरा मंजूर, मगर चेहरे को ढकना नहीं

अमित बिश्‍नोई

जनपद मेरठ में कोरोना संक्रमण तेजी से पैर पसार रहा है। रविवार को जिले में 219 नये कोरोना संक्रमित मिले और एक मरीज की मौत हो गयी। बढ़ती कोरोना मरीजों की संख्या ने मेरठ को खतरनाक शहरों की श्रेणी में ला दिया है। मगर जनपद की महिलाओं को मास्क पहनना मंजूर नहीं है। शहर की सड़कों पर बिना मास्क पहने घुमती युवतियां, महिलाएं आपको आसानी से दिख जायेंगी। हां पुलिस को देखते ही वह अपने दुपट्टे से चेहरा ढक लेती हैं लेकिन वो शर्म-हया सिर्फ पुलिस के सामने रहने तक ही होती है। इसके बाद मास्क हो या दुपट्टा, चेहरे से हटा ही नजर आता है। वहीं महिला होने के कारण उनसे कोई रोका-टोकी भी नहीं करता। लेकिन कोरोना महिला-पुरुष में भेद नहीं करता और सब पर एक समान हमला करता है।

कोरोना के खौफ से बेफ़िक्र मेरठ की सड़को पर कोल्डड्रिंक का आंनद लेती युवती

मेरठ में महामारी बढ़ने का मुख्य कारण लोगों की लापरवाही है जो बिना मास्क पहने या चेहरा ढके घरों से निकल जाते हैं। मगर बात करें जिम्मेदारी की तो पुरुषों के मुकाबले मास्क न लगाने वाली महिलाओं की संख्या अधिक है। अगर आप सड़कों पर निकलें तो बिना मास्क पहने युवतियों से लेकर महिलाएं तक आपको बेफिक्र घुमती नजर आ जायेंगी। हां इन महिलाओं के पास साड़ी का पल्लू या दुपट्टा जरूर होता है जिससे वह पुलिस को देखते ही चेहरा ढक लेती हैं। लेकिन पुलिस का डर खत्म होते ही यह टेंपरेरी मास्क उड़न-छू हो जाता है। और यह दुपट्टा या साड़ी का पल्लू कोरोना संक्रमण से बचाने में कामयाब होना मुश्किल होता है। बल्कि देखा जाये तो ऐसे अस्थायी मास्क से कोरोना संक्रमित होने की संभावना और अधिक होती है।

यह कड़वी सच्चाई है जिससे स्वीकार करना मुश्किल तो है लेकिन हकीकत हम सभी जानते हैं। यदि बात करें शादी-ब्याह या समारोह की तो वहां भी आपको मास्क पहने पुरुष तो आसानी से दिख जायेंगे लेकिन चेहरा ढके महिला दिखना बेहद मुश्किल है। नाम न छापने की शर्त पर कई महिलाओं ने इस बात को स्वीकारते हुए कहा कि शादी हो या पारिवारिक फंक्शन, ब्यूटी पार्लर पर जाकर सजना-संवरना तो जरूरी होता है। अब घंटो ब्यूटी पार्लर पर बैठ कर, हजारो रुपये खर्च करने के बाद भी चेहरा ढक कर बैठना पड़े तो ऐसे मेकअप का फायदा क्या है। अब मुँह ढकने से मेकअप तो खराब होगा ही साथ ही सजने में खर्च हुआ समय और पैसा भी बेकार जायेगा। अब शादी-ब्याह रोज-रोज तो होते नहीं हैं तो अच्छा दिखना भी तो जरूरी है।

कोरोना का जरा भी नहीं खौफ

निःसंदेह हम महिलाओं की भावनाओं का सम्मान करते हैं मगर समाज पर आये संकट के समय में महिलाओं ने सदैव मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है। आज किसी महिला को मास्क पहनने के लिये कोई पुरुष नहीं टोक सकता मगर यदि महिलाएं स्वयं मास्क पहनें और पुरुषों को मास्क पहनने के लिये कहें तो उनकी बात का निश्चित ही सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जो कार्य सरकार और प्रशासन नहीं कर पाये वह कार्य करने का बीड़ा यदि महिलाएं उठा लें तो हर चेहरे पर मास्क नजर आयेगा और लोगों का जीवन सुरक्षित होगा।

लेकिन यह करने से पहले महिलाओं को भी कुछ समय के लिये चेहरे को उपयुक्त मास्क या कपड़े-दुपट्टे से ढककर चलना होगा। यदि महिलाओं ने यह जिम्मेदारी समझी और अपने परिवार के किसी भी सदस्य को बिना मास्क पहने घर से निकलने नहीं दिया तो यकीन मानिये कोरोना को देश से बाहर जाने में देर नहीं लगेगी।

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