10वीं की परीक्षा रद होने से मेधावी छात्रों को नुकसान

मेरठ रीजन10वीं की परीक्षा रद होने से मेधावी छात्रों को नुकसान

Date:


10वीं की परीक्षा रद होने से मेधावी छात्रों को नुकसान

  • औसत नंबर दिये जाने से उनकी मेरिट होगी प्रभावित
  • बाद में परीक्षा देने का विकल्प मगर कब होगी पता नहीं

सुनील शर्मा

न्यूज डेस्क। भारत में कोरोना संक्रमण हर दिन रिकार्ड तोड़ रहा है। कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या से जहां सरकार चिंतित है वहीं जनता दहशत में है। कोरोना के खौफ के बीच अनेक राज्यों ने अपने-अपने बोर्ड की परीक्षाएं रद करने के बाद सीबीएसई परीक्षा को भी रद करने की मांग की थी। वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी सीबीएसई परीक्षा को रद किये जाने की मांग को लेकर शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा था। आज सरकार ने 4 मई से शुरू होने वाली सीबीएसई की कक्षा 10 की परीक्षाएं रद कर दी हैं। कक्षा 12 की परीक्षाएं भी टाल दी गयीं हैं और आने वाली एक जून को सरकार इस पर फैसला लेगी।

लेकिन कक्षा 10 की परीक्षा रद हो जाने से मेधावी छात्रों को बड़ा झटका लगा है। दरअसल कोरोना काल में छात्रों ने स्कूल को पूरी फीस देने के बावजूद लगभग पूरे साल ऑनलाइन पढ़ाई की है। इसके लिये जहां उन्हें कंप्यूटर, लैपटाॅप या मोबाइल खरीदने पर मजबूर होना पड़ा वहीं मोबाइल डाटा का खर्चा भी उनके जिम्मे आ गया। न समझ में आने वाली ऑनलाइन पढ़़ाई के बाद उन्होेंने सेल्फ स्टडी पर ध्यान दिया और दिन-रात कड़ी मेहनत कर परीक्षा की तैयारी की। लेकिन अंतिम समय पर कक्षा 10 की परीक्षाएं रद होने के बाद उनको अपना करियर प्रभावित होने का डर सताने लगा है।

दरअसल, कक्षा 10 के अच्छे नंबर छात्र को किसी भी प्रतियोगी परीक्षा से लेकर इंटरव्यू तक में महत्वपूर्ण मदद करते हैं। ऐसे में अभी सीबीएसई या सरकार द्वारा परीक्षा न होने पर दिये जाने वाले अंकों के आधार के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी है लेकिन माना जा रहा है कि छात्रों को इंटरनल एक्जाॅम के आधार पर या सभी को किसी अन्य फार्मूले से औसत अंक दिये जा सकते हैं। ऐसे में असली नुकसान उन छात्रों को होगा जिन्होंने साल भर कड़ी मेहनत कर पढ़ाई की है। हालांकि सीबीएसई बाद में इन छात्रों को परीक्षा देने का विकल्प प्रदान कर सकती है। मगर यह परीक्षा कब होगी या होगी भी के नहीं इसका भरोसा नहीं है। वहीं परीक्षा होने तक छात्र खुद को मानसिक तौर पर तैयार रख पायेगा की नहीं यह भी संशय बना हुआ है।

मेरठ के गंगानगर क्षेत्र में रहने वाले दीपांशु चौधरी और कार्तिक धामा कक्षा 10 की परीक्षा रद किये जाने से बेहद परेशान हैं। पूरे साल ऑनलाइन के साथ सेल्फ स्टडी में दिन-रात एक करने वाले दीपांशु और कार्तिक को इस साल अच्छी मेरिट आने की उम्मीद थी। जी-तोड़ मेहनत करने के बावजूद अंतिम समय में परीक्षा रद होने से उनको औसत नंबर मिलने का डर सता रहा है। यदि ऐसा हुआ तो उनके पूरे साल की कड़ी मेहनत का फल उन्हें मिलने से रह जायेगा।
वहीं हापुड़ की रहने वाली दिव्यांशी ने पूरे साल लैपटाॅप-मोबाइल पर ऑनलाइन पढ़ाई करने के साथ एक्स्ट्रा ट्यूशन भी लिये। दिव्यांशी और उनकी मां मंजीत चौधरी को पूरी आशा थी की उन दोनों की मेहनत कामयाब होेगी और दिव्यांशी को परीक्षा में अच्छे नंबर मिलेंगे। लेकिन अब परीक्षा रद होने और औसत अंक मिलने की आशंका ने दिव्यांशी को पूरे साल की मेहनत बेकार चले जाने की चिंता सताने लगी है।

वहीं कुछ अभिभावकों को स्पष्ट कहना है कि यदि सीबीएसई ने अपनी नीतियां स्पष्ट नहीं की तो वह अगले साल फिर से अपने बच्चों को कक्षा 10 की परीक्षा दिलाने का प्रयास करेंगे। अब कक्षा 10 की परीक्षा कैंसल हो जाने के बाद कक्षा 12 के छात्रों को भी अपनी मेहनत जाया जाने की चिंता सता रही है। कक्षा 12 में पढ़ने वाली गांव भोजपुर में रहने वाले अनुभव के पिता योगेश भारद्वाज का कहना है कि बच्चे को कोरोना से बचना भी जरूरी है और अच्छे करियर के लिये परीक्षा में उसके अच्छे नंबर आना भी आवश्यक है। यदि ऐसे ही हालात रहे तो बच्चे को परीक्षा देने के लिये भेजना मुश्किल होगा। यदि सरकार कक्षा 12 की परीक्षा रद करती है तो अगले साल परीक्षा दिलाने की सोचेंगे।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

ममता बनर्जी का बीजेपी पर हमला, बोलीं- मैं तब तक लड़ती रहूंगी, जब तक आपका अंत नहीं देख लूं

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC)...

PoK में बढ़ते तनाव पर संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता, निष्पक्ष जांच और राजनीतिक बातचीत की अपील

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने पाकिस्तान...