लाॅकडाउन बेअसर, प्रदेश में पहले नंबर पर पहुंचा मेरठ
सोमवार को मिले 2269 नये कोरोना संक्रमित, 6 ने गंवाई जान
मेरठ। सोमवार को मिले 2269 नये कोरोना संक्रमितों के साथ मेरठ जनपद उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या के मामले में टाॅप पर आ गया है। चिंता की बात यह है कि प्रदेश में दूसरे नंबर पर आने वाले लखनऊ में मेरठ से लगभग आधे 1274 मरीज मिले हैं। यानी लंबे समय तक मेरठ प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले में पहले स्थान पर ही रहने की संभावना दिख रही है। तीसरे नंबर पर आने वाले गोरखपुर में 1031 नये मरीज मिले हैं। इसके बाद गौतमबुद्धनगर, सहारनपुर, वाराणसी, बरेली, मुरादाबाद, झांसी और कानपुर नगर का नंबर आ रहा है।
बीते 24 घंटों में मेरठ जनपद में 2269 नये कोरोना मरीज मिले है। वहीं कोरोना संक्रमित 6 मरीजों ने जान गंवा दी। जिले में कोरोना से जान गंवाने वालों की संख्या अब 586 हो गयी है। 959 मरीजों को विभिन्न अस्पतालों से डिस्चार्ज किया गया है। अब तक 43783 मरीज कोरोना को मात देकर स्वस्थ हो चुके हैं। वर्तमान में जिले में 14007 एक्टिव केस हैं
पुलिस-प्रशासन की नजरअंदाजी, लाॅकडाउन बेमानी

प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार रोकने के लिये लाॅकडाउन लगाया गया और बाद में उसकी अवधि बढ़ा भी दी गयी। उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या में कमी आयी है मगर मेरठ में कोरोना का कोप तेज होता जा रहा है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले में पहले स्थान पर आ जाने वाले मेरठ में हालात भयावह होते जा रहे हैं।

मेरठ में कोरोना संक्रमण फैलने की पहली वजह लोगों की लापरवाही है जो बेखौफ सड़कों पर घुम रही है। मगर इससे भी बड़ी लापरवाही है मेरठ के पुलिस-प्रशासन की जो सड़कों पर बेवजह घुमने वालों पर सख्त कार्रवाई करने से परहेज कर रहा है। वहीं महानगर के प्रमुख बाजारों में भीड़ को व्यवस्थित करने की दिशा में भी कार्य नहीं किया जा रहा।

कोरोना संक्रमण बढ़ने के बावजूद मेरठ के प्रमुख बाजारों जैसे खैरनगर, कोटला और शहर कबाड़ी बाजार में ग्राहकों की भारी भीड़ के कारण तिल रखने की भी जगह नहीं मिलती। ऐसे में कोरोना संक्रमण को रोक पाना नामुमकिन दिखाई दे रहा है। कोरोना की पहली लहर में पुलिस-प्रशासन ने सख्ती दिखाई थी जिससे कोरोना का प्रसार होने से रोका जा सका था। मगर कोरोेना की दूसरी लहर में पुलिस-प्रशासन भी सब कुछ राम भरोसे छोड़ कर बैठा है। हां, खानापूर्ति के लिये कुछ जगहों पर सख्ती दिखाई जाती है, चंद चालान भी काटेे जाते हैं। मगर यह दिखावा कागजों का पेट तो भर सकता है, अधिकारियों का संतुष्ट भी कर सकता है मगर कोरोना को बढ़ने से नहीं रोक सकता, और हो भी ऐसा ही रहा है।

