- प्रधानपुत्र के समर्थक के घर पर रखी थी यह बाइक
- एसपी हापुड़ ने बाइक बरामदगी के दिए थे आदेश
मेरठ। यूपी गवर्नमेंट के सख्त आदेश के बाद भी पुलिस के आरोपियों से मिलीभगत के मामले सामने आ रहे हैं. योगी गवर्नमेंट ने आदेश दे रखे हैं कि यदि किसी पुलिसकर्मी की अपराधियों से सहभागिता मिली तो सख्त कार्रवाई तो की ही जाएगी. साथ ही प्रॉपर्टी भी जब्त कर ली जाएगी. लेकिन पुलिस विभाग में कुछ लोग ऐसे हैं जिनके लिए यह महज कागज पर लिखा आदेश है. ताजा मामला मेरठ के गांव रसूलाबाद नानपुर से जुड़ा है. आरोप है कि जिले के गढ़ थानेदार ने जांच के नाम पर चोरी की बाइक को दबा लिया. जबकि इस बाइक को बरामद करने के आदेश एसपी हापुड़ नीरज जादौन ने दिए थे. सूत्रों का दावा है कि बाइक ग्राम प्रधान के गुर्गों के घर पर खड़ी थी. जहां से पुलिस ने उसे बरामद कर लिया. लेकिन 15 दिन बीतने के बाद भी प्रधानपुत्र और उसके गुर्गे के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई. जबकि प्रधान और उसके पुत्र का आपराधिक इतिहास भी है.
थानाध्यक्ष गढ़ ने बताया कि बुलेट मोटरसाइकिल की बरामदगी के आदेश दिए गए थे. इस मामले में अभी जांच चल रही है. बुलेट आई कहां से इसके बारे में पता लगाया जा रहा है. चोरी की बाइक का यह मामला गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है. लोगों का कहना है कि इतने दिन सिर्फ एक बाइक की जांच में लग जाएंगे तो अपराधियों के हौसले और बुलंद हो जाएंगे. कही यह बाइक खपाने का प्रयास तो नहीं.
नानपुर चौकी इंचार्ज पर लग चुके आरोप
हापुड़ के कप्तान के आदेश के बाद भी पुलिस की जांच में तेजी नहीं आई है. चोरी की बाइक खरीदना अौर बेचना या उसे अपने घर में रखना संगीन जुर्म है. ऐसी बाइकें किसी क्राइम को अंजाम देने के बाद भी खड़ी की जा सकती है. इससे पहले एक मामले में नानपुर चौकी इंचार्ज पर भी प्रधान को संरक्षण देने के आरोप लगे थे. यह शिकायत सही पाए जाने पर कप्तान ने चौकी इंचार्ज को लाइन का रास्ता दिखा दिया था. इसी प्रधान से जुड़ा मामला है.

