नई दिल्ली: उत्तराखंड सरकार ने ऐलान किया है कि नौजवान जो सोशल मीडिया पर देश विरोधी समझे जाने जैसा कुछ लिखते हैं तो उन्हें पासपोर्ट बनवाने और हथियार लाइसेंस प्राप्त करने से रोका जा सकता है। इससे पहले बिहार सरकार ने कुछ इसी प्रकार का फैसला लिया है जिसमें किसी भी तरह से सरकार विरोधी प्रदर्शनों में भाग लेने वाले व रोड जाम करने वाले नौजवानों को सरकारी नौकरी, बैंक लोन, सरकारी ठेका आदि देने से रोका जा सकता है ।
टीओआई की एक खबर के मुताबिक, दोनों ही राज्यों की सरकारों के द्वारा जारी आदेशों के तुरंत बाद संबंधित राज्यों के पुलिस प्रमुखों ने अपनी तरफ से बयान जारी कर कहा कि सरकार के इस फैसले में कुछ नया नहीं है। साथ ही दोनों राज्यों में डीजीपी ने कहा कि उनके द्वारा लागू किए जाने वाले नियमों की बुनियादी संरचना में “कुछ भी नया नहीं” था।
मंगलवार को देहरादून में पुलिस अधिकारियों के एक सम्मेलन के समापन समारोह में उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पुलिस सोशल मीडिया पर हो रहे गतिविधियों का एक डेटाबेस बनाएगी जो राष्ट्र-विरोधी या असामाजिक है। इसके साथ ही डीजीपी ने कहा कि जब कोई व्यक्ति पासपोर्ट या हथियार लाइसेंस के लिए आवेदन करता है तो पुलिस इन डेटाबेसों के आधार पर ही इन लोगों का सत्यापन करेंगे। यह निर्णय पुलिस के दो दिवसीय सम्मेलन में लिया गया था।
उत्तराखंड सरकार के इस फैसले से एक दिन पहले ही बिहार सरकार ने विरोध को दबाने के लिए फैसला लिया था। बिहार डीजीपी एसके सिंघल के आदेश अनुसार, सोमवार को जारी निर्देश में नौ सेवाओं को सूचीबद्ध किया गया है, जिनके लिए पुलिस सत्यापन की आवश्यकता है: सरकारी नौकरी, सरकारी परियोजनाओं के लिए अनुबंध, हथियार लाइसेंस, पासपोर्ट, चरित्र प्रमाण पत्र, पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियों के लाइसेंस, बैंक ऋण, संविदात्मक कार्य सरकारी सहायता प्राप्त संगठनों और किसी अन्य कार्य के लिए जिसके लिए पुलिस एक सत्यापन आवश्यक है।

