SKM ने दी संयुक्त समाज मोर्चा को चोट

उत्तराखंडSKM ने दी संयुक्त समाज मोर्चा को चोट

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SKM ने दी संयुक्त समाज मोर्चा को चोट

कहा, किसी भी राजनीतिक दल को अपने बैनर या मंच का इस्तेमाल नहीं करने देंगे

नई दिल्ली। पंजाब के 22 किसान संगठनों द्वारा मिलकर बनाए गए संयुक्त समाज मोर्चा द्वारा पंजाब की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने इस राजनीतिक मोर्चा से कोई संबंध होने से इंकार कर दिया है। शनिवार को एक स्पष्टीकरण जारी कर संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि वह किसी भी राजनीतिक दल को अपने बैनर या मंच का इस्तेमाल नहीं करने देंगे।

गौरतलब है कि आज पंजाब के 22 किसान संगठनों ने मिलकर संयुक्त समाज मोर्चा के गठन का ऐलान किया है। बीकेयू नेता राजेवाल के नेता बलवीर सिंह राजेवाल को मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया गया है। संयुक्त समाज मोर्चा ने राज्य की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने और प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करने का दावा किया है।

पंजाब के किसान संगठनों द्वारा बनाए गए संयुक्त समाज मोर्चा से संयुक्त किसान मोर्चा ने किनारा कर लिया है। एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की नीति है कि राजनीतिक दल को मोर्चा के बैनर और मंच का इस्तेमाल नहीं करने दिया जायेगा। संयुक्त किसान मोर्चा इसी नीति पर कायम है। 15 जनवरी को होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में यह तय किया जाएगा कि चुनाव लड़ने वाले किसान संगठन और उनके नेता संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल रह सकते हैं या नहीं।

किसान मोर्चा के वरिष्ठ नेता योगेंद्र यादव ने ट्वीट कर लिखा की आज चंडीगढ़ में पंजाब के कुछ किसान संगठनों द्वारा संयुक्त समाज मोर्चा के नाम से पंजाब के विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेने की घोषणा का संयुक्त किसान मोर्चा से कोई संबंध नहीं है। यादव ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की यह नीति रही है कि हमारे नाम और मंच का इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल द्वारा नहीं किया जाएगा।

भाजपा को मिला संयुक्त किसान मोर्चा पर सवाल उठाने का मौका
चुनाव लड़ने की तमन्ना मन में लिए किसान संगठनों के नेताओं को संयुक्त किसान मोर्चा से मिली चोट क्या असर दिखाती है यह तो आने वाले दिनों में सामने आ ही जाएगा। लेकिन किसान आंदोलन के दौरान खुद को अराजनैतिक बताने वाले किसान संगठनों का आंदोलन की सफलता के बाद राजनीतिकरण हो जाने से विवाद खड़ा होना स्वाभाविक है। किसान आंदोलन को शुरूआत से ही राजनीति से प्रेरित बताने वाली भाजपा को किसान संगठनों के चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद संयुक्त किसान मोर्चा पर सवाल खड़े करने का मौका मिल जाएगा। किसान संगठनों की सबसे बड़ी ताकत यही थी कि वह अराजनीतिक था। लेकिन वही किसानों की ताकत उनके राजनीतिक पार्टी में तब्दील हो जाने के बाद उनके साथ रहेगी कि नहीं यह कहना मुश्किल होगा। क्योंकि किसान हमेशा किसान का साथ तो देता है मगर जब बात राजनीति की हो तो उसकी सोच बदल जाती है।

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