पुरखों की विरासत बचाने के दबाव के साथ राजनीति की कसौटी पर खरा उतरने का इम्तिहान

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पुरखों की विरासत बचाने के दबाव के साथ राजनीति की कसौटी पर खरा उतरने का इम्तिहान

मेरठ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 – विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान समाप्त हो चुका है। वहीं अब अन्य चरणों के मतदान की शुरूआत हो चुकी है। सबसे अंत में पूर्वाचल की 54 सीटों के लिए सांतवें चरण का मतदान होगा। जिन 54 सीटों परे पूर्वांचल में मतदान होगा। उनमें वीआईपी जिला वाराणसी भी शामिल है। वीआईपी इसलिए क्यों कि यहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सांसद हैं। अंतिम सातवें चरण के लिए नामांकन शुरू हो चुका है। इन 54 सीटों में नौ सीटें ऐसी हैं जहां पर इस बार पुरखों की विरासत बचाने के साथ ही खुद भी राजनीति की कसौटी पर खरा उतरने की परीक्षा है। ये सभी वो सीटें हैं। जहां पर पिछले कई दशकों से एक ही परिवार का कब्जा रहा है। इनमें से एक सीट वाराणसी कैंट भी है।

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कैंट विधानसभा पर भाजपा के जन्म से जनसंघी रहे और प्रदेश के पूर्व वित्तमंत्री हरिश्चचंद श्रीवास्त्व उर्फ हरीश जी का दबदबा रहा है। इस बार उनके पुत्र सौरभ चुनावी मैदान में है। ये सीट हरिश्चंद्र का परिवार पिछले तीन दशक से जीतता आ रहा है। हरीश जी की पत्नी ज्योत्सना श्रीवास्तव व खुद हरीश इस सीट पर कई बार जीते हैं। यहां की गली—गली में उनके परिवार को बड़ा सम्मान मिलता रहा है। इस बार इसी सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद डॉ0 राजेश मिश्र उतरे हैं। इसी तरह से आजमगढ़ की अतरौलियां सीट पर विधायक संग्राम सिंह यादव, सदर से दुर्गा प्रसाद यादव, मिर्जापुर के चुनार विधानसभा से भाजपा के विधायक अनुराग सिंह के अलावा मऊ से मुख्तार अंसारी लगातार पिछले कई दशकों से जीतते आए हैं। इस बार इन सभी का राजनैतिक भविष्य दांव पर हैं। बात बलिया की करें तो यहां के फेफना विधानसभा से उपेंद्र तिवारी और रसड़ा सीट से बसपा विधायक उमाशंकर सिंह, मोहम्मदाबाद विधानसभा से भाजपा के दिग्गज रहे दिवंगत कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय तीसरी बार जीत की तैयारी में है। ओमप्रकाश सिंह जो कि गाजीपुर जिले की जमानिया विधानसभा सीट से लगातार छह बार विधायक चुने जा चुके हैं। इस बार फिर से मैदान में है। पूर्व मंत्री और दबंग नेता बच्चा पाठक को बलिया में कौन नहीं जानता। बच्चा इस बार मैदान में तो नहीं हैंं लेकिन उनके पौत्र कांग्रेस प्रत्याशी पुनीत पाठक दादा की विरासत बचाने को मैदान में है।

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