लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पांचवे चरण (Fifth phase) में रामनगरी अयोध्या में मतदान होना है। रामजन्मभूमि विवाद और 1991 के करीब शुरू हुए मंडल-कमंडल के दौर से ही अयोध्या (Ayodhya) और भाजपा एक दूसरे का पर्याय बन चुके हैं। भाजपा का गढ़ के रूप में जाने-जाने वाली अयोध्या विधानसभा सीट पर 2012 को छोड़कर 1991 से बीजेपी ही काबिज है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने अयोध्या जिलें की सभी पाँच सीटों पर अपना परचम लहराया था। हालांकि इस बार राममंदिर (Ram mandir) के पक्ष में फैसला आने और मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद भी बीजेपी के लिए अयोध्या में परिस्थितियाँ अनुकूल नहीं लग रही है।
बतादे कि अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण प्रारम्भ होने के बाद से ही स्थानीय व्यापारियों और विस्थापित हो रहे नागरिकों में विस्थापन को लेकर वर्तमान विधायक वेद प्रकाश गुप्ता के प्रति असंतोष है जिसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ सकता है। विकास और विस्थापन के बीच सामंजस्य नहीं बैठने से भाजपा के लिए यह संकट का विषय बन गया है।
गौरतलब है कि मुख्य राम मंदिर के लिए अयोध्या से नगर के शहादतगंज तक सड़क चौड़ीकरण और कॉरीडोर निर्माण के लिए जो जमीन चिह्रित हुई है, उसमें करीब 600 दुकाने और आवसीय मकान शामिल है जिसपर बुलडोजर चलना लगभग तय है। जिसके कारण क्षेत्र के लगभग 10 हजार दुकानदार और मकान मालिक प्रभावित हो रहे है। दुकानदारों का कहना है कि उनके जीवन भर की रोजी रोटी के बदले मिलने वाला मुआवजा बहुत कम है। इसी असंतोष को अयोध्या के विपक्षी दल हवा देकर भाजपा के विरुद्ध माहोल बना रहे है।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इस चुनाव में भाजपा राम मंदिर मुद्दे का सही लाभ नहीं ले पायी इसलिए तीसरे चरण के मतदान के बाद बीजेपी ने राममंदिर निर्माण का मुद्दा फिर ज़ोर-शोर से उठाना शुरू किया है। विदित है कि 2017 के चुनाव में भाजपा ने अवध में पड़ने वाले चौथे चरण में 59 में 51 और पांचवे चरण में 61 में से 51 सीटें जीती थी। इसलिए भाजपा राम मंदिर निर्माण में प्रथम चरण में पूर्ण हुए कार्य का प्रचार करने से नहीं चूक रही जबकि निर्माण का दूसरा चरण मध्य नवंबर तक पूरा हो होगा।
विपक्ष खासकर सपा के नेता तेज नारायण पांडे (पवन पांडे) जिंहोने 2012 में पाँच बार के बीजेपी विधायक लल्लू सिंह को हराया था, वो विकास और विस्थापन से उत्पन्न नाराजगी का लाभ उठाने का हर संभव प्रयास कर रहे है। सपा जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए भाजपा सरकार से सवर्णों खासकर ब्राह्मणों की नाराजगी का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। अयोध्या सीट पर लगभग 3.81 लाख वोटर है जिनमें ब्राह्मणों की संख्या करीब 62,000 से अधिक है, जबकि वैश्य मतदाताओं की संख्या 52,000, मुस्लिमों की 55,000 और यादवों की 37,000 है।
वहीं भाजपा प्रत्याशी वीपी गुप्ता ने एक वर्ग के नाराज होने के बारे में कहा कि, “आप राजनीति में हर व्यक्ति को संतुष्ट नहीं कर सकता। हालांकि, मैं कह सकता हूँ कि मैंने लोगों के लिए काम और विकास किया है। मुख्यमंत्री योगीजी ने भी अयोध्या में बहुत विकास किया है और जल्द ही इसका कायाकल्प होने वाला है”।
हालांकि यह तो 10 मार्च को ही पता चलेगा की यहाँ की जनता ने विकास और विस्थापन में किसे चुना है। लेकिन राम मन्दिर मुद्दे के सहारे 2 सांसदो से कई राज्यों में सरकार चलाने वाली भाजपा के लिए भी अयोध्या में चुनौती कम नहीं है। यही कारण है कि योगी अपने कार्यकाल में 46 बार अयोध्या आए है।

