देहरादून। पड़ोसी राज्य उप्र में चार बार बसपा (BSP) की सत्ता रही। पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यकाल का लोहा उनके विपक्षी भी मानते हैं। आज भी उप्र में मायावती (Mayawati) के शासनकाल की लोग चर्चा करते हैं। लेकिन जब बसपा के दुर्दिन शुरू हुए तो ऐसी गत हुई कि उप्र में मात्र एक सीट ही जीत पाई और पहाड़ में भी बीएसपी को दो सीटें मिली। दो सीटें तो मिली लेकिन यहां पर बसपा का मत प्रतिशत का ग्राम बुरी तरह से गिरा है। यूपी के मुकाबले बसपा उत्तराखंड में मजबूती से उभरी है।
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2017 के चुनाव में बसपा को एक भी सीट नहीं मिली थी। लेकिन इस बार दो सीट जीतकर बसपा ने उत्तराखंड में 2017 का अकाल भी दूर कर लिया है। उत्तराखंड के चुनावी (Uttarakhand election 2022) इतिहास में बसपा का वोट प्रतिशत काफी हद तक स्पष्ट है। मैदानी जिलों में बसपा का वोट प्रतिशत चुनाव दर चुनाव बढ़ा है। हालांकि, 2017 के चुनाव में बसपा को नुकसान हुआ और वोट प्रतिशत 6.98 प्रतिशत पर पहुंचा। उससे पहले 2002 के चुनाव में बसपा का वोट प्रतिशत 10.93 था। जबकि उसके बाद 2007 के चुनाव में पार्टी का वोट प्रतिशत 11.76 पर पहुंच गया।
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2012 के विस चुनाव में बसपा का वोट प्रतिशत बढा और यह 12.99 तक पहुंच गया। लेकिन 2017 में बसपा ने न तो कोई सीट जीती और न ही वोट प्रतिशत गिरा या बढ़ा। इस बार 2022 के चुनाव में बसपा के दो प्रत्याशी चुनाव जीतने में सफल हुए। जिनमें लक्सर सीट से मोहम्मद शहजाद और मंगलौर विधानसभा सीट पर सरवत करीम अंसारी जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे हैं। हालांकि, बसपा का वोट प्रतिशत गिरकर 4.83 तक पहुंच गया है।

