मेरठ। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के इस समय बुरे दिन चल रहे हैं। पिछले तीन दशक से कांग्रेस प्रदेश में सत्ता वापसी का सपना देख रही है। लेकिन पार्टी का सपना इस बार भी पूरा नहीं हुआ। विधानसभा चुनाव ( Vidhan Sabha Chunav) में कांग्रेस की बुरी दुर्गति हुई है। जिसके बाद अब पार्टी के भीतर बगावती सुर तेज हो गए हैं। वहीं पार्टी की ओर से प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने के लिए दिया गए रुपयों को लेकर भी रार छिड़ गई है। हारे हुए प्रत्याशियों ने संगठन आरोप लगाए तो संगठन पदाधिकारियों ने प्रत्याशियों पर पदाधिकारियों की अनदेखी के आरोप मढ दिए। पदाधिकारियों और प्रत्याशियों ने एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए वाट्सएप ग्रुप वार शुरू कर दी है। वहीं कुछ स्थानों पर इस्तीफा भी दिया गया है।
Read also: यूपी की नई विधानसभा में 51 प्रतिशत विधायक पर दर्ज हैं आपराधिक मामले: एडीआर
बता दें कि कांग्रेस ने अपने प्रत्येक प्रत्याशी को चुनाव लड़ने के लिए 25 से 35 लाख रुपये तक दिए थे। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रत्याशियों ने संगठन से मिले रुपये ही चुनाव में खर्च नहीं किए। तो जीत कहां से होती। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि विधानसभा क्षेत्र में मतदान के दिन तो मतदान अभिकर्ता बनाए गए थे। उनके खर्च के लिए प्रत्येक बूथ वार दो हजार रुपये दिए गए थे। लेकिन किसी भी बूथ में रुपया मतदान अभिकर्ता तक नहीं पहुंचा। यह रुपया कहां और किसके पास गया इसको लेकर घमासान मचा हुआ है।

