मेरठ। तहसीलों में समाधान दिवस और थाना दिवस अब गुजरे जमाने की बात होगी। अब ग्रामीणों की समस्या का समाधान गांव की चौपाल पर ही होगा। मेरठ में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसके लिए सभी 12 ब्लाकों में एक-एक ग्राम पंचायत का चयन किया जाएगा। योजना की सफलता के बाद सभी ब्लाकों में ग्राम पंचायतों की संख्या में बढ़ोत्तरी की जाएगी। एमएलसी चुनाव के दौरान लगी आचार संहिता खत्म होने के बाद हर महीने निर्धारित दिन पर गांव के मिनी सचिवालय में चौपाल लगाई जाएगी। जिसमें प्रधान की अध्यक्षता में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
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यह चौपाल गांव में तहसील और थाना दिवस की तरह ही लगाई जाएगी। जो कि महीने में एक बार ही लागई जाएगी। बता दें कि ग्रामीणों की समस्याओं का सामाधान दिवस से लेकर तहसील दिवस और थाना दिवस तक में अंबार लगा रहता है। इसके बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं होता है। वहीं आइजीआरएस पोर्टल पर भी ग्रामीणों की उनके गांव से जुड़ी समस्याओं की भरमार रहती है। जिससे कि समय निकलने के बाद भी समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पाता। इसी कड़ी में अब इन समस्याओं को ग्रामीण स्तर पर ही निपटाया जाएग। इस योजना के अनुसार अब पंचायत स्तर पर ही ‘ ग्राम चौपाल का आयोजन किया जाएग। जिसमें ग्रामीणों की समस्या का समाधान गांव में हल किया जाएगा।
मेरठ के सभी 12 ब्लाकों में एक ग्राम पंचायत का चयन किया जाएगा।
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ग्राम चौपाल में प्रधान,पंचायत सचिव,लेखपाल के अलावा एएनएम और शिक्षक रहेंगे। इसके साथ ही एक बीट सिपाही, पंचायत सहायक, रोजगार सेवक आदि मौके पर रहेंगे जो कि ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण करेंगे। गांव में समस्या को हल करने का ये अभियान अप्रैल माह के तीसरे सप्ताह से शुरू करने की योजना है। इस ग्राम चौपाल से ग्रामीणों को राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं उनकी समस्याएं भी मौके पर निस्तारित हो सकती हैं। डीपीआरओ मेरठ रेनू श्रीवास्तव ने बताया कि शुरूआत में प्रत्येक ब्लाक से एक ग्राम पंचायत को चयनित किया जाएगा। एमएलसी चुनाव आचार संहिता खत्म होते ही इस योजना पर अमल शुरू किया जाएगा।

