ज्ञानव्यापी मस्जिद परिसर की सर्वे के लिए अदालत द्वारा नियुक्त किये गए एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा को अनियमितता के आरोप में कल कोर्ट ने कमीशन से बाहर कर दिया था, आज अजय मिश्रा के साथी वकीलों की ओर अदालत में उन्हें बहाल करनी की अर्ज़ी दी गयी है. इन लोगों का कहना है कि अजय मिश्रा के साथ राजनीती की गयी है, चूँकि अजय मिश्रा ने 6 और 7 मई को जब पहली बार सर्वे शुरू हुआ था वह सर्वे अजय मिश्रा द्वारा किया गया था इसलिए उस पहले सर्वे की रिपोर्ट अजय मिश्रा को ही पेश करने की अनुमति दी जाय.
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बता दें कि वाराणसी की अदालत द्वारा श्रृंगार गौरी पूजा मामले में पांच महिलाओं द्वारा दायर याचिका पर सर्वे के लिए कमीशन नियुक्त किया था और अजय मिश्रा को कमिश्नर लेकिन मुस्लिम पक्ष ने अजय मिश्रा के नाम पर ऐतराज़ किया था और अदालत से उन्हें कमीशन से हटाने के लिए अर्ज़ी डाली थी जिसे अदालत ने ख़ारिज कर दिया था लेकिन साथ ही में दो और कोर्ट कमिश्नरों की नियुक्ति भी कर दी थी और बाद में 14 मई से लेकर 15 मई तक मस्जिद परिसर का सर्वे और फोटोग्राफी कराई गयी, लेकिन 17 को रिपोर्ट सबमिट करने वाले दिन साथी कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह की शिकायत पर वाराणसी की अदालत ने अजय मिश्रा को कमीशन से हटा दिया था और रिपोर्ट फाइल करने के लिए दो दिन का अतिरिक्त समय भी दे दिया था.
कमीशन से हटाए जाने के बाद अजय मिश्रा ने विशाल सिंह पर धोखेबाज़ी का आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके खिलाफ साज़िश हुई है, अजय मिश्रा के आरोप के जवाब में विशाल सिंह ने कहा था कि कोर्ट ने मेरे कहने पर अजय मिश्रा को नहीं हटाया, मैंने एक तथ्य था जो कोर्ट के सामने रखा था ताकि सभी चीज़ें क्लियर हो जाएँ, उन्हें हटाने का फैसला कोर्ट ने उन तथ्यों के आधार पर लिया। अब देखना है कि कोर्ट इस नई अर्ज़ी पर क्या कार्रवाई करती है. अगर कोर्ट उन्हें 6 और 7 मार्च के सर्वे की रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति देती है तो फिर क्या इस सर्वे कमीशन की दो रिपोर्ट दाखिल होंगी, हालाँकि अजय मिश्रा को हटाए जाने पर रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर पहले ही प्रश्नचिन्ह लग चुके हैं.
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