क्लाइमेट चेंज ने मौसम के मिजाज को बिगाड़ दिया है। हाल में आई एक स्टडी रिपोर्ट में सामने आया है कि ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की स्थिति ऐसे ही जारी रही और वायुमंडल में मौजूद गैसों का तापमान ऐसे बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में भारत का तापमान सहारा रेगिस्तान जितना हो जाएगा। यूरोप,चीन और अमेरिका के वैज्ञानिकों के अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले 50 सालों में भारत में मौसम की स्थिति और भयावह होगी। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस के एक अध्ययन में कहा है कि आने वाले सालों में भारत में 1.2 बिलियन लोग गर्मी के इस ताप का सामना करेंगे। जबकि पाकिस्तान में 100 मिलियन, नाइजीरिया 485 मिलियन गर्मी के प्रकोप का सामना करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार मानव आबादी औसत सालाना तापमान छह डिग्री सेंटीग्रेड से लेकर 28 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान में निवास करती है। यह तापमान लोगों की सेहत और खाद्य उत्पादन के लिहाज से बेहतर होता है। यदि यह तापमान बढ़ता रहा तो इसका असर आर्थिक, सामाजिक,राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक होगा। इसके कारण मानव आबादी के लिए रहन-सहन,आजीविका से लेकर खाद्यान्न संकट की समस्या उत्पन्न बढ़ेगी।
कोरोना ने पूरी दुनिया को ऐसी मुश्किल में डाला है जिसकी कल्पना करनी मुश्किल है। कमोबेश ऐसी स्थिति क्लाइमेट चेंज कर सकता है। कोरोना जैसी आपदा की तरह इसमें फिलहाल कोई बड़ा परिवर्तन नहीं दिखाई देता। आने वाले समय में दुनिया के कई हिस्से रहने लायक नहीं रहेगे। ये दोबारा ठंडे नहीं होंगे। इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। समाज को ऐसी आपदा से निपटने के लिए बड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा। आने वाले समय में इस समस्या का मूल समाधान कॉर्बन उत्सर्जन में कटौती है। साफतौर पर एक ग्लोबल एप्रोच बनानी होगी। जिससे बच्चे इस सामाजिक, वैश्विक आपदा से निपट सकें।
शोधकर्ता ने कहा कि यह आंकड़े हमारे लिए चौंकाने वाले थे। लेकिन हमने इनका आकलन दोबारा से किया। हम जानते हैं कि कई प्राणी अलग-अलग तापमान में खुद को समायोजित करते हैं। मसलन पेंग्विन बहुत ठंडे तापमान में रहती है तो कोरल गर्म पानी में निवास करती है। मानव के संदर्भ में यह बात नहीं है। मानव मौसम के अनुरूप गर्म कपड़े और एयरकंडीशन का उपयोग करते हैं। आने वाले 50 सालों में मौसम का भयावह बदलाव होने वाला है। उन्होंने कहा कि ऐसे में नीति निर्माताओं को जल्दी विचार करना होगा वरना बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती है। हमें पर्यावरण बचाने के उपायों पर गौर करना चाहिए। तापमान का एक डिग्री सेंटीग्रेड बढ़ना लाखों लोगों की जान के लिए मुश्किल हो जाएगा।

