मेरठ। प्रदेश में तीन बार मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता में सोमवार की सुबह करीब 9:00 बजे देहांत हो गया। मुलायम सिंह यादव के साथ समाजवादी पार्टी का एक युग हमेशा के लिए खत्म हो गया। कभी हिंदू हृदय सम्राट माने जाने वाले दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जब राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहे थे। उस दौरान मुलायम सिंह यादव ने उन्हें सहारा दिया। कल्याण सिंह की बनाई राष्ट्रीय क्रांति पार्टी को साथ लेकर मुलायम सिंह यादव ने 2004 , 2007, 2009 में चुनाव लड़ा। जब कल्याण सिंह भाजपा से अलग हुए तो मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह की दोस्ती परवान चढ़ी थी। दोनों के बीच काफी नजदीकिया थी और दोनों एक—दूसरे को मित्र कहते थे।
मुलायम सिंह पुराने साथी और सपा के अलीगढ़ के पूर्व जिलाध्यक्ष रछपाल सिंह का कहना है कि सियासी तौर पर कल्याण सिंह को भाजपा से अलग होने पर नेताजी ने सहारा दिया। उन्होंने बताया कि मुलायम सिंह अतरौली में बैठक लेने के लिए आया करते थे। जनसभाओं को संबोधित करने के लिए कल्याण सिंह के गढ़ आए थे। 2007 और 2009 के चुनाव में कल्याण के गढ़ अतरौली के आलमपुर गांव में मुलायम सिंह ने मंच साझा किया था।
दोनों बड़ी राजनीतिक शख्सियत थी। सन 2002 में जब कल्याण सिंह की भाजपा के बड़े नेताओं से बिगडी तो उन्होंने राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बना ली थी। उस दौर में मुलायम सिंह यादव ने कल्याण के वजूद को कम नहीं होने दिया। कल्याण सिंह कहा करते थे कि यह दोस्ती भाजपा को खत्म करने के लिए काफी है। हालांकि कल्याण सिंह ने सपा सदस्यता कभी नहीं ली थी। लेकिन उनके बेटे राजवीर राजू भैया और कुसुम राय ने सपा का दामन थामा था। उस समय मुलायम सिंह यादव ने इसे गठबंधन नहीं, बल्कि दोस्ती का नाम दिया था और वही कल्याण सिंह ने दो दिलों के मिलने की बात कही थी।
लेकिन जब बात 6 दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद जब गिरी थी। तब मुलायम सिंह यादव, मौलाना मुलायम और कल्याण सिंह की पहचान हिंदू हृदय सम्राट के रूप में बनी थी। दोनों के बीच तल्खी इतनी बढ़ गई थी कि सियासत के साथ-साथ निजी तौर पर दोनों अलग-अलग ध्रुव पर खड़े थे। लेकिन समय बीतने के साथ दोनों के संबंध सामान्य हो गए। मुलायस सिंह के 1977 से साथी रहे रक्षपाल सिंह बताते है कि जब मुलायम सिंह यादव किसी से दोस्ती करते थे तो पूरी सहायता करते थे।
हालांकि सियासत में दोनों के कद और पद में काफी समानताएं थीं। लेकिन विचारों में दोनों ने विपरीत ध्रुवों के साथ राजनीतिक सफर शुरू किया था। 1967 में कल्याण सिंह जनसंघ के टिकट पर पहली बार विधायक बने। जबकि मुलायम सिंह घोर समाजवादी विचारों से प्रेरित थे और 1977 में जनता पार्टी की सरकार में मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह दोनों ही मंत्री थे। दोनों ने पिछड़ों की सियासत में भागीदारी को लेकर काम किया।
2009 में मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह मिले थे। उस समय लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह और कल्याण सिंह जनसभाओं में लोगों को संबोधित करते थे। इस दौरान मुलायम सिंह यादव ने कल्याण सिंह को समाजवादी पार्टी की लाल टोपी पहनाई और नारे लगवाए थे। सियासी हलकों में मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह की दोस्ती के कसीदे पढ़े गए। लेकिन दोनों नेताओं की दोस्ती आगे नहीं चल पाई। 2009 के चुनाव में सपा को नुकसान हुआ तो वहीं पार्टी के अंदर कल्याण सिंह के खिलाफ आवाज उठने लगी थी। मुलायम सिंह यादव ने बाद में खुलासा किया था कि भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से हाथ मिलाना उनकी सबसे बड़ी गलती थी। इसके लिए उन्होंने माफी भी मांगी थी।
पूर्व सांसद विजेंद्र सिंह ने बताया कि मुलायम सिंह यादव जनसभाओं में कल्याण सिंह को बड़ा भाई कहकर संबोधित करते थे। उन्हें अपनी पार्टी के मंचों पर सम्मान देते थे। उन्होंने कहा कि जब कल्याण सिंह बुलंदशहर लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे। उस दौरान मुलायम सिंह यादव ने उन्हें मदद की थी।

